लखनऊ/दिल्ली: सियासी शुद्दिकरण के लिए दागी नेताओं के मुद्दे पर सड़क से संसद तक तमाम सवाल, बार-बार उठते हैं चुनाव से पहले तो हर बार उठते हैं. लेकिन चुनावी दंगल में दागियों के यही दाग राजनीतिक दलों को अच्छे लगने लगते हैं. सूबा-ए-उत्तर प्रदेश की केवल 7 सीटों के समर में भी इन सवालों का कोई सवाली नहीं रहा. क्योंकि, शुद्धिकरण की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले सभी दलों ने 7 सीटों पर भी दागियों पर खूब दुलार लुटाया है ।
इतने उम्मीदवारों पर मुकदमे
इलेक्शन वॉच और ADR की रिपोर्ट के मुताबिक इस उपचुनाव में 21 % उम्मीदवार दागदार हैं यानि,मात्र 7 सीटों के इस चुनाव में भी 18 उम्मीदवारों के दामन पर ‘दाग’ हैं. इन 18 उम्मीदवारों के ऊपर आपराधिक मुकदमे दर्ज है. इसमें भी 15 उम्मीदवार के ऊपर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
किस-किस पार्टी में कितने दागी
अब पार्टियों में दागियों के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि, इस उपचुनाव में बसपा ने जो 7 उम्मीदवार उतारे हैं उनमें से 5 के ऊपर आपराधिक मामले दर्ज है.सपा के 6 में से 5 तो कांग्रेस का 6 में से 1 उम्मीदवार दागी है. बीजेपी के लिए सुकुन और गर्व की बात ये कि, इस उपचुनाव में उतरे उसके सभी उम्मीदवार एकदम चमकदार है।
बड़ा सवाल…?
अब इसे दुनिया के सबसे बड़ो लोकतंत्र का दुर्भाग्य कहें या दागियों पर सियासत का दुलार पूरे देश-प्रदेश के चुनाव में एक-दो दागियों का दंश तो झेला जा सकता है. लेकिन क्या, मात्र 7 सीटों के उपचुनाव में भी साफ छवि वाले उम्मीदवार नहीं मिले? सवाल ये भी है कि, क्या दागी उम्मीदवारों के हाथों बंधक हो गया है दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र ?
