लखनऊ: लव जेहाद पर अध्यादेश के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक और अध्यादेश लाने जा रही है. यूपी सरकार मंदिरों, मस्जिदों और दूसरे धार्मिक स्थलों के संचालन के लिए नियम-कायदे तय करने की कवायद कर रही है. उसी सिलसिले में गाइडलाइंस बनाने का काम चल रहा है. इस अध्यादेश के बाद प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों का रजिस्ट्रेशन कराना होगा. दान-दक्षिणा का भी हिसाब किताब रखना होगा. हालांकि, इस अध्यादेश के बाद धार्मिक स्थलों का संचालन और सुविधाएं सुलभ हो जाएंगी ।
क्या है अध्यादेश ?
मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक स्थल रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन अध्यादेश 2020 का प्रस्तुतीकरण देखा है. बताया जा रहा है कि अपर मुख्य सचिव (धर्मार्थ कार्य) को धार्मिक स्थल रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन अध्यादेश 2020 का प्रस्तुतीकरण दिया है. इस प्रेजेंटेशन में यूपी के तमाम धार्मिक स्थलों के संचालन और रखरखाव के लिये बनने वाली गाइडलाइंस पर बात हुई. मुख्यमंत्री ने उसमें कुछ संशोधन और दूसरे लोगों से विचार करने को कहा है. इसके लिए दूसरे राज्यों के कानूनों और प्रस्तावों का अध्ययन किया जा रहा है. जल्द ही कैबिनेट में इसका संशोधित प्रस्ताव पेश होगा. बता दें कि हाल ही में मंत्रिमंडल की बैठक में धर्मार्थ कार्य विभाग निदेशालय गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी ।
दान-दक्षिणा का देना होगा हिसाब
दरअसल, सरकार चाहती है कि, धार्मिक विवाद खत्म हों, सरकारी जमीनों या सार्वजनिक स्थानों पर बनने वाले धार्मिक स्थलों पर रोक लगे और बेहतर संचालन के साथ-साथ चंदे का हिसाब-किताब भी रखना होगा. धार्मिक स्थलों को संचालन समिति को पूरी जानकारी देनी होगी ।
साधु-संतों ने जताया विरोध
अध्यादेश लाए जाने से पहले ही इसका विरोध शुरू हो गया है. साधु-संतो की सबसे बड़ी संस्था अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के महंत नरेंद्र गिरी ने कहा है कि, इस तरह का कोई भी अध्यादेश लाने से पहले संतों से राय ली जानी चाहिए. किसी भी तरीके से साधु-संतो और धार्मिक स्थलों को सरकारी नियंत्रण में नहीं लाना चाहिए ।
