ऐतिहासिक आंदोलन खत्म, किसानों की ‘घर वापसी’!

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दिल्ली: साहस…सहनशक्ति और संघर्ष के 1 सल बाद…देश के अन्नदाता की जीत हुई…तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुरु हुआ किसानों का ऐतिहासिक आंदोलन, आखिरकार 378 दिन बाद अपने अंजाम पर पहुंचकर खत्म हो गया. सरकार की चिट्ठी के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया. इस जीत से उत्साहित किसानों ने गाजीपुर और सिंघु बॉर्डर पर जश्न मनाया. हालांकि, किसानों का कहना है कि, अभी आंदोलन स्थगित हुआ है, खत्म नहीं हुआ है, मागें पूरा ना होने पर आंदोलन जारी रहेगा।

किसानों ने रखी थी ये मांगें

तीनों किसान कानून रद्द होने के बाद भी किसानों क आंदोलन खत्म नहीं हुआ था. किसानों ने सरकार के सामने अपनी कई मांगे रखीं. इनमें MSP की गारंटी सबसे अहम मांंग है. इसके अलावा सभी राज्यों में आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज हुए मुकदमे वापस हों, आंदोलन में जान गवाने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा मिले, पराली जलाने पर आपराधिक मामला दर्ज ना हो और बिजली बिल पर किसानों के साथ चर्चा हो ।

सरकार ने मानी ये मांगे…

किसानों की लंबित मांगों पर सरकार की तरफ से कृषि सचिव के हस्ताक्षर से चिट्ठी भेजी गई थी. उसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने बैठक की. केंद्र सरकार ने नए मसौदे में प्रदर्शनकारियों पर से तत्काल केस वापसी के साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP कमिटी को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कमिटी तय करेगी कि सभी किसानों को एमएसपी MSP मिलना किस तरह सुनिश्चित किया जाए. मुआवजे को लेकर सहमति जताई और बिजली बिल को लेकर कहा गया कि संसद में लाने से पहले संयुक्त किसान मोर्चा से चर्चा की जाएगी।

11 दिसंबर को घर वापसी

तमाम जगह से किसानों ने अपने टेंट-तंबू हटाने शुरु कर दिए हैं. 11 दिसंबर को किसान अपने घर लौट जाएंगे. किसान नेताओं कहना है कि अहंकारी सरकार को झुका कर जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ स्थगित हुआ है. 11 दिसम्बर से घर वापसी होगी.  राजेवाल ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा बरकरार रहेगा. हर महीने 15 तारीख को बैठक होगी. किसानों के मुद्दे पर आंदोलन जारी रहेगा. चुनाव में उतरने सवाल पर कहा कि मोर्चा चुनाव नहीं लड़ेगा।

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