तो क्या सुमित बजरंग दल छोड़कर फौज में जाने वाला था ?

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बुलंदशहर: हिंसा में मारा गये सुमित को लेकर उनके पिता अमरजीत सिंह ने कई खुलासे किए हैं, एक अखबार को इंटरव्यू देते हुए अमरजीत सिंह ने बताया कि सुमित फौज की तैयार कर रहा था गांव में रहने वाले अमरजीत सिंह की उम्र लगभग 62 वर्ष हो चुकी है और उन्होंने बुलंदशहर हिंसा में अपना सबसे छोटा बेटा सुमित (18) खो दिया है। सुमित को लेकर लोगों के जेहन में तमाम सवाल हैं। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे विडियोज में पत्थरबाजी करते हुए दिख रहे शख्स को सुमित बताया जा रहा है, सवाल उठाया जा रहा है कि पुलिस पर पथराव करने वाले व्यक्ति को मुआवजा क्यों दिया जाए। हालांकि, पिता अमरजीत सिंह और सुमित के बड़े भाई विनीत कुमार कहते हैं कि विडियो में जो दिख रहा है वह सुमित नहीं है। हमें जबरन शिकार बनाया जा रहा है, फंसाया जा रहा है, अमरजीत सिंह बताते हैं कि उनका भरणपोषण खेती से हो रहा था। परिवार में अमरजीत सिंह की पत्नी गीता देवी, चार बेटियां बबली, अंजू, मीनू और मंजू के साथ-साथ दो बेटे विनीत कुमार (20) और सुमित भी था। अमरजीत की दो बेटियों बबली और अंजू की शादी हो चुकी थी। वह बताते हैं कि परिवार की हालत ठीक न होने की वजह से मंजू और मीनू नोएडा में नौकरी करती हैं।

चार वर्षों से नोएडा में रहकर पढ़ाई कर रहा था सुमित
मृतक के पिता ने बताया, ‘सुमित ने हाई स्कूल किसान इंटर कॉलेज बरौली से किया था। इसके बाद उसे मैंने नोएडा भेज दिया, जहां से उसने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई की। फिलहाल, वह प्राइवेट रूप से बीए सेकंड ईयर की पढ़ाई चिंगरावठी से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक कॉलेज से कर रहा था।’ सुमित के पिता का कहना है, ‘हाई स्कूल के बाद से ही सुमित अपनी दो बहनों (मीनू और मंजू) के साथ नोएडा में रहता था।’

दीपावली से अपने गांव चिंगरावठी में था सुमित
अमरजीत सिंह 3 दिसंबर को हुई हिंसा का जिक्र करते हुए बताते हैं, ‘वह (सुमित) लगभग 20-25 दिन से गांव आया हुआ था। सुमित सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था, एनडीए वगैरह का एग्जाम दे चुका था। उसके घुटने के नीचे नस में दिक्कत हो गई थी। जब वह दीपावली में घर आया तो मैंने उसे गढ़मुक्तेश्वर के करीब एक रिटायर्ड डॉक्टर को दिखाया। वह अब सही हो गया था और वापस लौटने की तैयारी ही कर रहा था। पड़ोस में 13 (दिसंबर) तारीख को शादी थी। सुमित कहने लगा कि पापा कहिए तो मैं शादी देखकर चला जाऊंगा वरना मुझे वापस आना पड़ेगा। सुमित ने कहा कि बहन भी शादी में आएंगी तो मैं उनके साथ ही लौट जाऊंगा। इसके बाद मैंने दोनों बेटों (विनीत और सुमित) को पास में ही डिफेंस की तैयारी के लिए कोचिंग भेजना शुरू कर दिया।’

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पिता ने सुमित को बाइक से जाने की नहीं दी इजाजत
अमरजीत सिंह बताते हैं, ‘सुमित से बड़े और चार बहनों में छोटे विनीत ने भी आर्मी की एक-दो भर्ती देखी हैं। उस दिन बुलंदशहर के पास इज्तिमा था, जिसकी वजह से बसें बंद थीं। सुमित के पास दोस्त का फोन आया कि बसें बंद हैं तो मैं कोचिंग नहीं जा रहा हूं। सुमित ने मुझसे पूछा कि पापा बाइक से चले जाएं। इस पर मैंने कहा कि बसें बंद हैं तो बाइक से न जाओ। आज घर में ही पढ़ो।’ सुमित के पिता कहते हैं, ‘वह सोच रहा था कि यदि आर्मी वगैरह में भर्ती न हो पाया तो वह ग्रैजुएशन कर ले ताकि दरोगा की भर्ती देख सके, इस वजह से वह बीए कर रहा था।’

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मैंने कहा हुड़दंग बंद नहीं होता तब तक नहीं जाना
सुमित के पिता अमरजीत सिंह ने हिंसावाले दिन को याद करते हुए बताया, ‘घटनावाले दिन चिंगरावठी पुलिस चौकी में शोर हो रहा था, वहां से उनके घर की दूरी 400-500 मीटर है। घटना के दिन सुमित का एक दोस्त आ गया था, बसें बंद होने की वजह से उसने बेटे से कहा मुझे किसी परिचित के साथ गाड़ी में बैठा दो तो मैं निकल जाऊंगा। यह सुनकर मैंने कहा कि जब तक हुड़दंग बंद नहीं हो जाता तब तक कहीं नहीं जाना है। कुछ देर बाद शोर बंद हो गया तो बेटे के दोस्त ने कहा सुमित को साथ भेज दीजिए अंकल तो मैं निकल जाऊं। दोनों वहां से चले गए। चिंगरावठी चौकी के पास ही चौराहे के पास दोनों इंतजार कर रहे थे तभी स्याना की ओर से लोग हाथ में मशाल, लाठी-डंडे लेकर आते हुए दिखे। इसी दौरान मेरे बेटे को गोली लग गई।’

बेटे सुमित के लिए शहीद का दर्जा चाहता है परिवार
सरकार की ओर से दिए जा रहे मुआवजे से सुमित का परिवार संतुष्ट नहीं है। अमरजीत कहते हैं, ‘मैं बहुत गरीब और छोटा किसान हूं। मेरी दो बेटियां कुंवारी बैठी हैं। मैं चाहता था कि मेरे बेटे को भी शहीद का दर्जा मिले। इन्स्पेक्टर के बराबर ही मुआवजा मिले।’

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