लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के 11 दिन बाद ही समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन दम तोड़ता दिख रहा है और अब दोनों ही पार्टियां अपने अपने रास्ते को चलती दिख रही हैं. उत्तर प्रदेश में मायावती भले ही गठबंधन से अलग होने के संकेत अपने बयानों के जरिए दे रही हों लेकिन अब इसे लेकर अखिलेश यादव भी पीछे रहते नहीं दिख रहे हैं. वैसे तो साफ साफ कुछ भी कहने से सपा अध्यक्ष बचते दिख रहे हैं लेकिन आजमगढ़ में पत्रकारों ने जब गठबंधन से जुड़े सवाल पूछे तो अखिलेश यादव बस इतना ही कह पाए कि अब हम अपने साधन और अपने संसाधनों से चुनाव लड़ेंगे.
चुनाव परिणाम की समीक्षा के लिए बीते दिन दिल्ली में हुई बैठक के दौरान बीएसपी प्रमुख मायावती ने कहा कि जो अपेक्षा थी गठबंधन से उनकी पार्टी को वैसा फायदा नहीं मिला और ऐसी स्थिति में गठबंधन की समीक्षा की जा रही है. साथ ही मायावती ने ये भी कहा कि यूपी में खाली हो रही 11 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में उतरने का भी फैसला किया गया है.
जहां एक तरफ दिल्ली में मायावती गठबंधन तोड़ने के संकेत दे रही थीं तो दूसरी तरफ अखिलेश वोटरों को जीत के लिए धन्यवाद कह रहे थे पर जैसे ही चुनाव नतीजे आए है उसके बाद से ये पहली दफा था कि अखिलेश यादव मीडिया से रूबरू हो रहे थे. यादव ने इस दौरान आगे की लड़ाई के लिए नयी योजना के तहत काम करने की बात की और कहा कि अब वो अपने साधन और अपने संसाधनों के दम पर ही हम चुनाव लड़ेंगे.
यादवों के वोट ट्रांसफर नहीं होने के मायावती के बयान पर यादव ने कोई जवाब देना सही नहीं समझा और जवाब देने से इनकार कर दिया पर फिर भी उन्होंने उस दौरान इशारों इशारों में ये जरूर कह दिया कि अपनी अगली लड़ाई वो अपने दम पर लड़ेगे जिसका जल्द ही खुलासा भी कर दिया जाएगा.
आपको बता दें कि बीएसपी की प्रमुख मायावती ने सोमवार को सपा से अपने गठबंधन को तोड़ने के संकेत दिए थे तभी से इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गयी थी. पार्टी नेताओं की एक बैठक में मायावती ने घोषणा की थी कि बीएसपी राज्य में अकेले 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव लड़ेगी. जिसका सीध अर्थ यही निकलता है कि मायावती सपा के साथ गठबंधन जारी रखने के विचार में नहीं हैं.
गौर करने वाली बात ये है कि समान्य तौर पर देखा गया है कि बीएसपी उपचुनाव नहीं लड़ती है पर इस बार उसके द्वारा उपचुनाव लड़ने की घोषणा की गयी है. मायावती ने साफ साफ कहा कि “बीएसपी को सपा के साथ किए गए गठबंधन से कोई लाभ नहीं हुआ. दोनों दलों के बीच वोट ट्रांसफर नहीं हो सका.” बहनजी ने पार्टी नेताओं से 11 विधानसभा सीटों के उपचुनावों के लिए उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार करने को भी कह दिया है. जानकारी दे दें कि ये विधानसभा सीट विधायकों के लोकसभा के लिए चुने जाने की वजह से खाली हुई हैं. बीजेपी के नौ विधायकों ने लोकसभा चुनाव जीतकर संसद का रास्ता तय कर लिया है तो वहीं बीएसपी और सपा के एक एक विधायकों के जीतने से ये दो सीट खाली हुई हैं.
देखना ये होगा कि बीजेपी की तरफ से चुनावों के दौरान जो भविष्यवाणी की गयी थी कि सपा-बसपा का गठबंधन चुनावी नतीजों के आने के बाद टूट जाएगा क्या उसके सच होने का समय आ गया है. सवाल ये भी उठता है कि क्या सपा और बीएसपी दोनों के ही अध्यक्षों का गठबंधन से मोहभंग हो गया है. अगर ऐसा होता है तो ये कोई आश्चर्य की बात नहीं लगती क्योंकि सामन्य तौर पर राजनीति में ऐसा ही होता है.
