रामपुर: प्रेरणा एप को लेकर पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें आ रही है. सरकार की नीतियों के खिलाफ रामपुर में भी सैकड़ों की संख्या में शिक्षक सड़क पर उतरे और अपना विरोध जताया.
सेल्फी वाली हाजिरी पर हल्लाबोल
सड़क पर उतरे इन शिक्षकों का दर्द ये था कि, सरकार उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार कर रही है. शिक्षक का पद सम्मान का पद है लेकिन जिस तरह से सरकार नीतियां और नियम बना रही है उसने शिक्षकों को शक के कठघरे में ला खड़ा किया है. शिक्षकों का कहना है कि, सरकार का इस तरह का व्यवहार समझ से परे हैं. क्या हम कोई अपराधी हैं
महिला शिक्षकों के ‘मन की बात’
सरकार जहां इस प्रेरणा एप के हजार फायदे गिना रही है. वही महिला शिक्षकों का भी अपना दर्द है. हर रोज सेल्फी से हाजिरी पर महिला शिक्षकों का कहना है कि, साइबर क्राइम के इस युग में उनकी निजता की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? महिला शिक्षकों का कहना था कि, प्रथम दृश्यता ही मामला निजता का उल्लंघन दर्शाता है. हर रोज खींची जाने वाली सेल्फी कहां जाएंगी उसका क्या डाटा सेंटर होगा और उनका गलत इस्तेमाल नहीं होगा इसकी गारंटी लेने वाला कोई नहीं है.
पढ़ाई के अलावा बेगारी पर बोले शिक्षक
रामपुर की सड़कों पर उतरे इन शिक्षकों का एक दर्द ये भी था कि, वो शिद्दत से सूबे की शिक्षा व्यवस्था में योगदान दे रहे हैं. प्राथमिक शिक्षा की तस्वीर बदलने में परिश्रम कर रहे हैं. लेकिन सरकार पढ़ाई के अलावा तमाम तरह की बेगारी भी शिक्षकों से करा रही है इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है. मिड-डे मिल, सेनेटरी पैड, एलवन्डाजोल की दवाई बांटना जैसे काम भी शिक्षकों के जिम्मे हैं आखिर स्वास्थ्य विभाग किसलिए है आशा कार्यकत्री किसलिए हैं.
