नई दिल्ली: सिम और बैंक खातों को मोबाइल से जोड़ना अब जरुरी नहीं है. हालांकि, इसका फैसला आप पर निर्भर करेगा कि, आप अपना आधार इनसे जोड़ना चाहते हैं या नहीं. शीतकालीन सत्र में कैबिनेट ने आधार लिंक करने की मंजूरी वाले कानून में संशोधन पर अपनी मुहर लगा दी. इसके लिए अब जरुरी नियमों को मद्देनजर रखते हुए नया ड्राफ्ट तैयार कर विधेयक लाया जा सकता है. और उसे इसी संसदसत्र में लोकसभा के पटल पर रखा जायेगा. ये संशोधन ऐसे वक्त में किया गया है जब चुनाव आयोग ने आधार को वोटर कार्ड से जोड़ने की सिफारिश की है.
आम आदमी के लिए बड़ी राहत
आम जनता के लिए राहत की बात ये कि, कोई बैंक और मोबाइल कंपनी आधार लिंक करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती. मौजूदा कानूनों में प्रस्तावित संशोधन हो जाने के बाद कोई व्यक्ति नए मोबाइल फोन कनेक्शन लेने और बैंक अकाउंट खोलने के लिए 12 अंकों वाले आधार नंबर को अपनी मर्जी से साझा कर सकेगा.सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में PMLA यानि टेलीग्राफ एक्ट एंड प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्टमें संशोधन के मसौदे पर मुहर लगा दी गई है.
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सुप्रीम कोर्ट ने दिया था बड़ा फैसला
दरअसल, कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने आदार को सिम और खाते से लिंक करने के मामले पर सुनवाई करते हुए आदार एक्ट के सेक्शन 57 को खारिज कर दिया था, इस ऐक्ट के मुताबिक बैंक खातों और सिम कार्ड को आधार से जोड़ना जरुरी था. तब फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि, मोबाइल सिम के लिए आधार कार्ड जरुरी नहीं है लेकिन पैन कार्ड के साथ आदार को लिंक करना अनिवार्य रहेगा. तब सरकार ने आश्वासन दिया था कि, वो शीतकालीन सत्र में आधार के नियमों में संशोधन करेंगे.

बिना आधार नहीं दी सेवा तो होगी सजा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सरकार ने भी लोगों को हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए संशोधन का फैसला लिया है. यह पूरी तरह से स्वैच्छिक होगा. मोबाईल फोन और बैंक खाते के लिए आधार की अनिवार्यता हटाने के अलावा अलावा आधार एक्ट में भी दो बदलाव किए हैं.
1- 18 साल की उम्र में लोगों को आधार छोड़ने का विकल्प दिया जाएगा.
2- आधार कार्ड की वजह से किसी सेवा से इनकार करने की मनाही होगी.
ऐसा करने वाले के लिए सजा का प्रावधान होगा.संशोधन पर मुहर के बाद अब सरकार की कोशिश इसी सत्र में संबंधित विधेयक लाने की है.
हैकरों की निकलेगी हेकड़ी
सरकार ने आधार की अनिवार्यता में जहां छूट दी है वही आधार के बिना सेवा ना देने वालों को कड़ी सजा का प्रावधान भी किया है. इसके साथ ही नए कानून के मुताबित UIDAI यूनिक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया की वेबसाइट हैक करने की कोशिश की तो 10 साल जेल की सलाखों में बिताने होंगे.
