ऑनलाइन सामान खरीदने पर अब नहीं मिलेगा Discount, ये है वजह

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नई दिल्ली : केंद्र सरकार ई-कॉमर्स के लिए एक ऐसी योजना बनाने जा रही है जिससे ई-कॉमर्स कंपनियों को झटका लग सकता है लेकिन दूसरी तरफ ई-कॉमर्स के द्वारा दिए जाने वाले ऑफर्स, कैशबैक और मुफ्त उपहार पर निगरानी रखे जाने पर होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा. ई-कॉमर्स के द्वारा दिए जाने वाले छूट, कैशबैक और मुफ्त उपहार शामिल है.

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय उन कदमों पर विचार कर रहा है जिससे कि ई-कॉमर्स के जरिये उनके नुकसान पहुंचाने वाले व्यवहार को रोका जा सके और साथ ही मंत्रालय उन कदमों को उठाने को लेकर भी चर्चा करने में लगा है कि जिससे ई-कॉमर्स क्षेत्र को मजबूती दी जा सके और साथ ही घरेलू रिटेलर्स के लाभ को भी अनदेखा न किया जाए.

बहुत से घरेलू रिटेलर्स ने ई-टेलर्स के साथ प्रतिस्पर्धा होने की वजह से व्यवसाय में नुकसान की शिकायत की. इतना ही नहीं नोटबंदी और जीएसटी के प्रतिकूल प्रभाव का भी जिक्र किया. लॉबी समूह जैसे कि द कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) और स्वदेशी जागरण मंच (आरएसएस संबद्ध) ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया है. मंच ने ये मुद्दा स्थानीय किराना और छोटी दुकानों के मालिकों की तरफ से उठाया है.

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सरकारी अधिकारियों ने ई-कॉमर्स पर नकेल करने को लेकर कहा कि इस कदम का अर्थ ये नहीं कि स्थानीय ट्रेडर्स को लुभाना चाहते हों. दरअसल, इसका लक्ष्य विश्व व्यापार संगठन द्वारा वैश्विक स्तर पर एक ऐसी नीति को बनाना है जिससे कि ई-कॉमर्स को विनियमित कर सके. कुछ ऐसा जिससे कि अमेरिका और चीन को एकजुट किया जा सके. आपको बता दें कि इस वक्त दोनों ही देश ट्रेड वॉर में लिप्ट दिखायी दे रहे हैं.

एक ड्राफ्ट ई-कॉमर्स नीति को इसी साल जुलाई में हितधारकों के साथ साझा किया गया. जिसके कुछ दिन बाद ही सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए अस्वीकार भी कर दिया गया था. इतना ही नहीं ई-कॉमर्स के द्वारा दी जा रही छूट को कम करने या फिर उसे बैन करने की मांग उठी थी. इससे जुड़े प्रस्ताव में कहा गया कि घरेलू ई-कॉमर्स कंपनियों को सहयोग प्रदान किया जाए जबकि कुछ हिस्सों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को सहमति दी गयी थी.

वैसे एफडीआई को उस वक्त लागू नहीं किया गया और फिर बाद में एक बार फिर मांग उठी कि ई-कॉमर्स को नियंत्रित किया जाए. वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि इससे जुड़े विवरण अभी तक बाहर नहीं आए हैं. वैश्विक तौर पर हमने रिटेल स्टोर्स को खत्म होने की कगार पर देखा है चाहे वो किताब की दुकाने हों या छोटी दुकानें. यहां तक कि इससे फॉर्मेट क्षेत्र पर भी दबाव बढ़ रहा है.

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