लखनऊ: पंचायत चुनाव को लेकर चल रही सरगर्मियां अब खत्म होने को हैं. कोरोना काल में अटके उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव को लेकर चुनाव आयोग सक्रिय हुआ है. फरवरी में बोर्ड की परीक्षाओं से पहले ये चुनाव कराए जा सकते हैं. कुल मिलाकर पार्टियों को अब गांव-कस्बों में अपनी ताकत दिखानी है. दरअसल,उपचुनाव का शोर थमते ही चुनाव की चाल अब गांव-कस्बों की ओर चलने वाली है. त्रिस्तरीय चुनाव के लिए कमर कसते हुए चुनाव आयोग फरवरी में पंचायत चुनाव कराने की तैयारी में है. प्लान ये है कि, पंचायत के चुनाव बोर्ड की परीक्षाओं से पहले ही करा लिए जाएं. इसके लिए दिल्ली से बैलेट पेपर भी मंगा लिए गए हैं. इन हालात में सियासी हलकों में भी हलचल होने लगी है ।
एक साथ होंगे चुनाव
दरअसल, सूबे की 59,163 ग्राम पंचायतों के मौजूदा ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पदों पर अक्टूबर में चुनाव होना था, लेकिन कोरोना काल की वजह से ना तो मतदाता सूची बन पाई ना ही परीसीमिन की प्रक्रिया पूरी हो पाई. अब कहा जा रहा है कि, इस बार जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी, प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य का चुनाव एक साथ कराया जा सकता है. वहीं उपचुनाव से निपटे सियासी दल भी अब पंचायत चुनाव के लिए कमर कस रहे हैं।
सहकारी चुनाव जीती बीजेपी उत्साहित है
छोटी संसद कहे जाते हैं पंचायत के चुनाव. क्योंकि, माना जाता है कि, जिस पार्टी ने जिला पंचायत पर झंडा फहरा दिया वो बीडीसी और प्रधान के जरिए गांव-गांव में पार्टी को मजबूत करता है और इसका फायदा विधानसभा और लोकसभा चुनाव में बखूबी मिलता है. वहीं कस्बों में चेयरमैन का चुनाव भी एक मजबूती की एक बड़ी चेन है. हाल ही में सहकारी बैंकों में विपक्ष का सफाया कर चुकी बीजेपी. पंचायत चुनाव को लेकर भी बेहद उत्साहित है।
कानून व्यवस्था चुनौती
वैसे तो बहुत दिलचस्प होता है पंचायत चुनाव का दंगल. लेकिन पंचायत चुनाव कानून व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती होते हैं. क्योंकि, पंचायत चुनाव में जहां पहले भी वर्चस्व की लड़ाई होती है तो वहीं चुनाव बाद बदले की गोलीबारी और किडनैपिंग जैसे कांड भी होते हैं. कुल मिलाकर अब उपचुनाव के बाद पंचायत में होगी जोरआजमाइश।
