लखनऊ: लो, जी हो गया महागठबंधन. 2019 से पहले बीजेपी के खिलाफ एकजुटता की आहें भर रहे विपक्षी दल एक बार फिर एक होने से पहले बिखरते दिख रहे हैं. गैर बीजेपी गठबंधन और तीसरे मोर्चे की जो मुहिम चल रही है. उसमें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी अब अपने पत्ते खोल दिए हैं.
बिना कांग्रेस के बनेगा गठबंधन
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गठबंधन पर बड़ा बयान देते हुए कांग्रेस से अपना हाथ झटक लिया है.मध्य प्रदेशमें सपा विधायक को मंत्री न बनाए जाने से नाराज दिखे अखिलेश यादव ने कहा कि, एमपी में हमने कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन दिया है फिर भी हमारे विधायक को कांग्रेस ने मंत्री नहीं बनाया. अपनी इस हरकत से कांग्रेस ने हमारा रास्ता साफ क दिया है. तीसरे मोर्चे की तरफ इशारा करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि, मैं चंद्रशेखर राव से मिलने हैदराबाद भी जाउंगा.
यहां से बिगड़े दिल
बता दें कि, एमपी में कांग्रेस को 214 सीटें मिली थीं वही बसपा को दो और सपा को भी 1 सीट मिली है. परिणाम के बाद सपा-बसपा ने कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन दिया है. लेकिन कांग्रेस ने किसी को भी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया. हालांकि, दिलों में दरार का एक पहलू ये भी है कि, इन राज्यों के शपथ ग्रहण समारोह में सपा-बसपा का कोई नेता शामिल नहीं हुआ था. और ये बात कांग्रेस खेमें में बहुत दिनों तक छाई रही थी.
मायावती पहले ही कांग्रेस से नाराज
दरअसल, महागठबंधन में सपा-बसपा पर सभी की नजर जमी हैं. लेकिन सपा-बसपा किसी गठबंधन शामिल होने के सवाल से बचते रहे हैं. कहा जा रहा है कि, इन दोनों दलों की रणनीति यूपी में गठबंधन करने की है. बसपा सुप्रीमो मायावती पहले ही कांग्रेस पर हमलावर रही है. मायावती ने कांग्रेस के लिए कहा था कि, कांग्रेस में अंहकार भरा हुआ है.
कांग्रेस से दूरी का बड़ा कारण
सपा और बसपा उत्तर प्रदेश में मजबूत जनाधार वाले दल हैं. दोनों दलों का अपना-अपना वोट बैंक भी है. और एक साथ आने पर दोनों दल सियासी गणित बना-बिगाड़ भी सकते हैं. इसकी बानगी उपचुनावों के परिणाम से बेहतर कहीं नहीं देखी जा सकती है. ऐसे में सपा-बसपा यूपी में कांग्रेस के साथ अपना बंटवारा नहीं चाहते हैं. बीते दिनों मीडिया में गठबंधन का जो फ़र्मूला सामने आया उसके मुताबिक बसपा 38 और सपा 37 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. 3 सीट रालोद और अन्य दलों को दी जायेंगी वहीं कांग्रेस की अमेठी-रायबरेली यानि राहुल गांधी और सोनिया गांधी की सीट पर ये अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे.
