लखनऊ: देश में NRC पर मचे शोर के बीच सूबा-ए-उत्तर प्रदेश में भी एक फरमान की गूंज सुनाई दे रही है. उत्तर प्रदेश की परिधी में रह रहे अवैध परदेशियों की पहचान के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशालय से निर्देश जारी हुआ है कि, पूरे उत्तर प्रदेश में अभियान चलाकर अवैध बांग्लादेशी और दूसरे विदेशी नागरिकों की पहचान की जाए और कार्यवाही भी की जाए.
डीजीपी ऑफिस से जारी हुआ है पत्र
पुलिस महानिदेश कार्यालय से इस अभियान के लिए मसौदा तायार कर सभी एडीजी जोन, डीआईजी रेंज, आईजी, एसएसपी और एसपी को भेजकर इस पर कड़ी से कड़ा कार्रवाई और तत्काल प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं.
क्या हैं पत्र में निर्देश?
1- इस अभियान के तहत सभी जिलों में घुसपैठियों का डाटा तैयार किया जाए, हर जिले का डाटा अलग-अलग रखा जाएगा
2-आंतरिक सुरक्षा के मद्देनजर इस अभियान को सख्ती और मुस्तैदी से चलाने के निर्देश
3- हर जिले के बाहरी इलाके, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सड़क किनारे रहने वाले लोग और नई बस्तियों को चिन्हित कर लोगं के सत्यापन कराने का निर्देश
4- दूसरे राज्यों से आए लोगों का सत्यापन कराया जाए
5-अवैध घुसपैठियों के वोटर कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट आदि बनवाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए
6- इस पूरे अभियान की वीडियोग्राफी भी कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं.
ये NRC नहीं है: डीजीपी ओपी सिंह
इस पर यूपी पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह का कहना है कि, इस पर भ्रम ना फैलाया जाए. ये NRC नहीं है. यह कार्य पपहले भी होता रहा है. इस बार भी पिछले सालों की तरह वाला कार्य ही नियमित है. ये केवल अवैध रूप से रहने वाले लोगों की पहचान और उनके दस्तावेजों के सत्यापन के लिए अभियान है जो गलत होंगे उन्हें निर्वासित कर दिया जाएगा. पिछले 5 सालों में ऐसे 200 से ज्यादा लोगों को पकड़ा भी गया है.
क्या ये NRC की ओर कदम है?
दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ असम की तरह प्रदेश में NRC लागू करने की इच्छा जता चुके हैं. एक इंटरव्यू में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि, असम ने हमें रास्ता दिखाया है. इधर पुलिस के इस अभियान को लोग एनआरसी से जोड़कर देख रहे हैं.इस मामले पर सियासत भी शुरु हो गई है. समाजवादी पार्टी का कहना है कि, ये उपचुनाव से पहले का एक सियासी शिगूफा है.
