लखनऊ/इलाहाबाद: भर्तियों को लेकर अदालती कठघरे में खड़े शिक्षा विभाग ने एक बार फिर सरकार की किरकिरी कराई है. इस बार उर्दू शिक्षक मामले में सरकार को झटका लगा है. उर्दू शिक्षक भर्ती मामले में सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है.
सरकार को ऐसे लगा झटका
दरअसल, सपा सरकार ने 4 हजार उर्दू शिक्षकों की भर्ती निकाली थी. सरकार बदलने के बाद योगी सरकार ने उर्दू शिक्षकों की भर्ती को रद्द कर दिया था. सरकार ने भर्ती रद्द करने के लिए तर्क दिया था कि. उर्दू शिक्षक पहले से ही मानक से ज्यादा हैं ऐसे में उर्दू शिक्षकों की अभी कोई जरुरत नहीं है. सरकार के इस फैसले के खिलाफ उर्दू शिक्षक हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे थे. उर्दू टीचर्स एसोसिएशन ने की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नियुक्ति देने का आदेश दिया था. इस फैसले पर पुनर्विचार के लिए सरकार की ओर से याचिका दाखिल की गई थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.
क्या था ये मामला?
15 दिसंबर 2016 को तत्कालीन सपा सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के 16,460 पदों की भर्ती निकाली थी. इनमें 4 हजार पद उर्दू शिक्षकों के लिए भी थे. उसी समय भर्ती पूरी होने से पहले ही सूबे में सरकार बदल गई. यूपी में बीजेपी की सरकार बन गई. तब मार्च 2017 में योगी सरकार ने समीक्षा के नाम पर ज्यादातर भर्तियों पर रोक लगा दी. इसमें उर्दू शिक्षकों की भर्ती भी थी. लेकिन जब मामला कोर्ट पहुंचा था तो कोर्ट ने सरकार को ये भर्ती पूरी करने के आदेश दिए थे. कोर्ट के आदेश पर नियुक्ति देने के बजाए शिक्षा विभाग भर्ती पर रोक के नए नए तरीके अपना रहा है.
उर्दू पढ़ने वाले छात्रों का आंकड़ा
इस भर्ती में सरकार पर भेदभाव के आरोप भी लगे. क्योंकि, 16460 पदों में से सरकार ने 12,460 सहायक पदों पर तो आदेश जारी कर दिए लेकिन 4 हजार उर्दू शिक्षकों की भर्ती रोक दी. वहीं बेसिक शिक्षा विभाग के मुताबिक यूपी के प्राथमिक स्कूलों में करीब 87,200 छात्र उर्दू पढ़ने वाले हैं.
