मज़दूरों का देश सिर्फ एक ही होता है, इसलिए वो देश लौट रहे हैं – फैज़ान हैदर

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लखनऊ : लॉकडाउन में कारखाने बंद, आटा-दाल मिल नहीं रहा, रोटी के लाले शायद इसलिए घर जाना ही अब मजबूरी है. बस मिली नहीं, ट्रक चल नहीं रहे, जेब मे पैसा नही शायद इसलिए हजारों लोग पैदल ही निकल पड़े. सिर पर सामान और मन में किसी भी तरह घर पहुंचने का लक्ष्य. कोई अयोध्या से चला तो कोई दिल्ली से, 100 से 200 किमी तक पैदल चलना पड़ रहा है, पांव में छाले, मगर सफर जारी है.

सबकी अपनी-अपनी मजबूरी है. लॉकडाउन में मुसीबत का बोझ लेकर पैदल चल रहे इन लोगों की दास्तां दिल को झकझोरने वाली है. अब ये कहना कोई गलत नही कि सरकार ने मज़दूरों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है. मज़दूर कहीं रेल पटरियों पर कट रहे हैं तो कहीं हाईवे पर ही भूख से दम तोड़ रहे हैं. वो अभी भी पैदल ही चल रहे हैं और अब हालात तो ये हैं कि एक वक्त का खाना भी नसीब नहीं हो रहा है. टीवी और ट्वीटर पर तो सरकार मज़दूरों के लिए बड़े-बड़े एलान करती दिख रही है लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त पर देखा जाए तो कुछ होता नही दिख रहा. अफसोस कि ये मज़दूर न तो फ़ेसबुक चलाते हैं और न ही ट्वीटर पर हैं. फिलहाल सरकार को तो इन मज़दूरों को घर पहुचाने के लिए भी कोई मिशन “वंदे मातरम” या मिशन “भारत माता की जय” चलाना चाहिए था ताकि ये लोग अपने-अपने घर तो पहुँच पाते.

लेकिन अफसोस राम के नाम पर सत्ता में आई इस पार्टी ने इन मज़दूरों को अब राम भरोसे ही छोड़ दिया है. अगर हालात ऐसे ही रहे तो वो दिन अब दूर नही की लोग कोरोना से कम भूख, लाचारी और अव्यव्यस्थाओं से ज़्यादा मरेंगे.

अपना उत्तर प्रदेश के लिए कानपुर से वरिष्ठ संवाददाता फैज़ान हैदर की रिपोर्ट

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