15अगस्त: PM मोदी के भाषण की बड़ी बातें, खास संदेश…’त्रिशक्ति’ और पंच प्रण

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दिल्ली: देश की आजादी के 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर, पूरे देश की नजरे लाल किले की उस प्राचीर पर जमी थीं जहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश का संबोधन करने वाले थे. तय समय के मुताबिक पीएम आए और इस ऐतिहासिक मौके पर देश से रुबरू हुए. खुशनुमा माहौल में लाहौरी गेट से होते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह-सुबह लाल किले (Red Fort) की प्राचीर पर पहुंचे। रास्ते में दो हाथियों ने पीएम की अगवानी की। लाल किले का प्रांगण तिरंगे के रंगों से सराबोर नजर आ रहा था। ठीक 7.30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने ध्वजारोहण किया। इसके बाद राष्ट्रगान की धुन ने हर भारतीयों को गौरव से भर दिया. आजादी के अमृत महोत्सव पर पीएम मोदी का भाषण इस बार दूसरी बार से जुदा रहा. देश और सिर्फ देश की बात थी. एक गर्वीला राष्ट्र, एक आत्मनिर्भर राष्ट्र. लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संदेश दिया कि हम जैसे हैं वैसे, यह हमारा मिजाज होना चाहिए।

पीएम मोदी का खास संदेश
इस दौरान पीएम मोदी ने देशवासियों को संकल्प दिलाया कि, अब हमें रुकना नहीं है, अगले 25 साल में भारत को विकसित राष्ट्र बनाना ही होगा. हमें छोटा नहीं अब बहुत बड़ा लक्ष्य लेकर चलना होगा. पीएम ने एक तरफ बापू, सुभाष को याद करते हुए नेहरू जी को नमन किया तो सावरकर के त्याग का भी जिक्र किया। उन्होंने इतिहास में भुला दिए गए उन क्रांतिकारियों को याद किया जिन्हें आजादी का अमृत महोत्सव में नमन किया जा रहा है ।

भावुर हो गए PM मोदी
आजादी के 75वें स्वतंत्रता दिवस (75th Independence Day) पर PM मोदी ने एक और बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि किसी न किसी कारण से हमारे अंदर यह विकृति आई है. हमारे बोलचाल में, हमारे व्यवहार में, हमारे कुछ शब्दों में.. हम नारी का अपमान करते हैं… क्या हम स्वभाव से, संस्कार से, रोजमर्रा की जिंदगी में नारी को अपमानित करने वाली हर बात से मुक्ति का संकल्प ले सकते हैं.. मोदी यह बोलते हुए भावुक हो गए। वह बोलते-बोलते कुछ देर के लिए रुक भी गए ।

भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद बड़ी चुनौती
PM ने कहा कि देश के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं. पहली चुनौती – भ्रष्टाचार और दूसरी चुनौती भाई-भतीजावाद और परिवारवाद है. मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह खोखला कर रहा है, उससे देश को लड़ना ही होगा। हमारी कोशिश है कि जिन्होंने देश को लूटा है, उनको लौटाना भी पड़े, हम इसकी कोशिश कर रहे हैं।

नेहरू जी को किया नमन
इस दौरान पीएम मोदी ने देश के पहले प्रधानंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को भी याद किया. आजादी की जंग लड़ने वाले और आजादी के बाद देश बनाने वाले डॉ. राजेंद्र प्रसाद हों, नेहरू जी हों, सरदार वल्लभ भाई पटेल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, लाल बहादुर शास्त्री, दीनदयाल उपाध्याय, जय प्रकाश नारायण, लोहिया, विनोबा भावे, नानाजी देशमुख, सुब्रमण्यम भारती ऐसे अनगिनत महापुरुषों को आज नमन करने का अवसर है।

मोदी की ‘त्रिशक्ति’
पीएम ने कहा कि आज दुनिया का भारत को लेकर नजरिया बदल चुका है. दुनिया भारत की धरती पर समाधान देखने लगी है. 75 साल की अनुभव यात्रा का यह परिणाम है। विश्व भी उम्मीदें लेकर जी रहा है, उम्मीदें पूरी करने का सामर्थ्य कहां पड़ा है. त्रिशक्ति के रूप में मैं इसे देखता हूं–
1. एसपिरेशन
2. पुनर्जागरण
3. विश्व की उम्मीदें

प्रधानमंत्री ने बताए पांच प्रण
पीएम ने पांच प्रण की बात की. उन्होंने कहा कि पहला प्रण अब देश बड़े संकल्प लेकर चलेगा और वो बड़ा संकल्प है विकसित भारत। अब उससे कम नहीं होना चाहिए।
दूसरा प्रण- किसी भी कोने में, हमारे मन के भीतर गुलामी का एक भी अंश अगर है तो उसे किसी भी हालत में बचने नहीं देना है। सैकड़ों साल की गुलामी ने हमारे मनोभाव को बांध कर रखा है, हमें गुलामी की छोटी सी छोटी चीज भी नजर आती है हमें उससे मुक्ति पानी होगी।
तीसरा प्रण: हमें हमारी विरासत पर गर्व होना चाहिए क्योंकि यही विरासत है जिसने कभी भारत को स्वर्णिम काल दिया था।
चौथा प्रण: एकता और एकजुटता, 130 करोड़ देशवासियों में एकता, न कोई अपना न कोई पराया। एकता की ताकत एक भारत श्रेष्ठ भारत के सपनों के लिए है।
पांचवां प्रण: नागरिकों का कर्तव्य, इसमें पीएम और सीएम भी आते हैं। ये हमारे आने वाले 25 साल के सपनों को पूरा करने के लिए बहुत बड़ी प्रणशक्ति है।

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