अयोध्या: 6 दिसंबर 1992, दोपहर 12.30 बजे देश भर को पता चल गया कि उन्मादी कारसेवक अयोध्या में बाबरी मस्जिद के एक गुंबद पर चढ़कर उसे तोड़ने में जुट गए हैं. दिल्ली स्थित तमाम मुस्लिम नेता प्रधानमंत्री दफ्तर में फोन करने लगे. हस्तक्षेप की उम्मीद के साथ. मगर हर बार जवाब मिलता, प्रधानमंत्री आराम कर रहे हैं. दोपहर 2.30 बजे कई नेता, समाजसेवी और धर्मगुरु राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा से मिलने पहुंचे. शर्मा रो रहे थे. उन्होंने आए हुए लोगों को एक खत दिखाया. ये खत शर्मा ने प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को लिखा था. इसमें कहा गया था कि अयोध्या में स्थिति विस्फोटक है, राज्य की बीजेपी सरकार की स्थिति साफ नहीं है. ऐसे में राज्य सरकार बर्खास्त कर केंद्र को सुरक्षा व्यवस्था अपने हाथ में ले लेनी चाहिए. फिर शर्मा बोले, मगर मैं भी प्रधानमंत्री तक नहीं पहुंच पाया.
सो रहे थे प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव
6 दिसंबर, 1992 को नरसिम्हा राव सुबह 7 बजे सोकर उठे. आमतौर से वो इससे पहले उठ जाते थे, लेकिन उस दिन देर इसलिए हुई क्योंकि उस दिन रविवार था. अख़बार पढ़ने के बाद उन्होंने अगला आधा घंटा ट्रेड मिल पर वॉक कर बिताया. इसके बाद उनके निजी डॉक्टर के. श्रीनाथ रेड्डी आ गए. राव के खून और पेशाब का नमूना लेने के दौरान दोनों तेलुगू और अंग्रेज़ी में बतियाते रहे, उसके बाद रेड्डी अपने घर चले आए. दोपहर बाद जब 12 बजकर 20 मिनट पर उन्होंने अपना टेलीविज़न खोला, तो उन्होंने देखा हज़ारों कारसेवक बाबरी मस्जिद के गुंबदों पर चढ़े हुए हैं.

दिल के मरीज थे पूर्व पीएम राव
1 बजकर 55 मिनट पर पहला गुंबद नीचे गिर चुका था. अचानक डॉक्टर रेड्डी ने सोचा, प्रधानमंत्री दिल के मरीज़ हैं, 1990 में हुए दिल के ऑपरेशन ने उन्हें करीब-करीब राजनीति से रिटायर करवा दिया था, रेड्डी प्रधानमंत्री का ब्लड प्रेशर जांचने दोबारा प्रधानमंत्री निवास पर पहुंच गए. जब तक बाबरी मस्जिद का तीसरा गुंबद भी गिर चुका था, डॉक्टर श्रीनाथ रेड्डी बताते हैं, “राव ने मुझे देख कर गुस्से से पूछा, ‘आप फिर क्यों चले आए?’ मुझे आपकी फिर जांच करनी है. मैं उनको बगल के छोटे कमरे में ले आया. जैसा कि मुझे उम्मीद थी, उनके दिल की धड़कनें तेज़ हो गई थीं.
मैं ऐसा कैसे कर सकता हूं…
माखनलाल फ़ोतेदार ने अपनी आत्मकथा ‘द चिनार कीव्स में लिखा है कि उन्होंने राव से फोन कर आग्रह किया था कि वो वायुसेना से कहें कि वो फैजाबाद में तैनात चेतक हैलिकॉप्टरों से अयोध्या में मौजूद कारसेवकों को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले चलवाएं. फ़ोतेदार ने आगे लिका है कि राव ने कहा मैं ऐसा कैसे कर सकता हूं.
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उनकी नाड़ी भी तेज़ चल रही थी. उनका ब्लड प्रेशर भी बढ़ा हुआ था. उनका चेहरा लाल हो गया था और वो काफ़ी उत्तेजित दिखाई दे रहे थे. मैंने उनको ‘बीटा ब्लॉकर’ की अतिरिक्त डोज़ दी और वहां से तभी हटा जब वो थोड़े बेहतर दिखाई देने लगे. उनके शरीर की जांच से ये नहीं लगा कि उनकी इस ट्रेजेडी में कोई साठगांठ थी. द बॉडी डज़ नॉट लाई.” इस घटना के बाद से ही कहा जाता है कि नरसिम्हा राव चाहते तो इस पूरे घटनाक्रम को होने से रोक सकते थे.
