अयोध्या पर बहुत बड़ी खबर, सुप्रीम कोर्ट ने दिया राम भक्तों को दिवाली का ये तोहफा

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नई दिल्ली : दिवाली आने वाली है मगर उससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राम भक्तों को बड़ा तोहफा दिया है, अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने तय की नई डेडलाइन, बहस का एक दिन और कम करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई के लिए तय समय सीमा में कटौती की है. शीर्ष कोर्ट ने मामले के सभी पक्षकारों से कहा कि वो 17 अक्टूबर तक बहस पूरी कर लें. इससे पहले शीर्ष कोर्ट ने बहस पूरी करने के लिए 18 अक्टूबर की तारीख तय की थी.

17 तक हो बहस पूरी- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की बहस पूरी करने की नई समय सीमा तय की है. शीर्ष अदालत ने मामले के सभी पक्षकारों से कहा कि वो 17 अक्टूबर तक बहस पूरी कर लें. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बहस पूरी करने के लिए 18 अक्टूबर की तारीख तय की थी. अब बहस पूरी करने के लिए एक दिन कम कर दिया गया है. अब रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के पक्षकारों को 17 अक्टूबर तक बहस पूरी करनी होगी.

37वें दिन क्या हुआ सुनवाई में

वहीं, सुप्रीम कोर्ट में 37वें दिन भी रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई जारी रही. शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष की तरफ से सीनियर एडवोकेट राजीव धवन ने अपनी दलीलें शुरू कीं. इस दौरान जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि क्या इस्लाम में देवत्व को किसी वस्तु पर थोपा जाता है? इस पर मुस्लिम पक्ष ने कहा कि दोनों धर्मों में ऐसा ही होता है, इस्लाम में मस्जिद इसका उदाहरण है.

हिंदू-मुस्लिम वकीलों ने दिये तर्क

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि हम हमेशा सुनते हैं कि ऐसा कुछ नहीं है, आप अल्लाह की पूजा करते हैं ना कि किसी वस्तु की. हम देखना चाहते हैं कि क्या किसी संस्था ने मस्जिद को पूज्य माना है, क्योंकि सिर्फ अल्लाह को पूजे जाने की बात आती है. इस दौरान सीनियर एडवोकेट राजीव धवन ने कहा कि हिंदू पक्षकार बाबर पर मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने का इल्जाम लगाते हैं, लेकिन बाबर कोई विध्वंसक नहीं था. मस्जिद तो मीर बाकी ने एक सूफी के कहने पर बनाई थी. इस दौरान उन्होंने पढ़ा कि ‘है राम के वजूद पर हिन्दोस्तां को नाज़ अहले नज़र समझते हैं उसको इमाम ए हिन्द.’

 

 

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