बसपा सुप्रीमो मायावती का सवर्ण आरक्षण को समर्थन, लेकिन रख दी ये शर्त

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लखनऊ : सवर्ण आरक्षण बिल को पीएम मोदी का चुनावी संटट बताया जा रहा है. आगामी लोकसभा चुनाव से कुछ समय पहले पीएम नरेंद्र मोदी सामान्य वर्ग को शिक्षा और नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण देने का बिल लेकर आए हैं. तो दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने सवर्णों को आरक्षण देने की मोदी कैबिनेट की मंजूरी का समर्थन किया है और कहा है कि उनकी पार्टी इस बिल का समर्थन करेगी. इसके अलावा उन्होंने इस बिल को लेकर मायावती ने मोदी सरकार पर निशाना साधा.

मायावती ने कहा कि “बीजेपी इस समय लगातार चुनाव हार रही है. ऐसे में गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के संदर्भ में उनकी यह घोषणा लोगों की नजर में चुनावी छलावा ही ज्यादा लग रहा है. लेकिन फिर भी बसपा इस संदर्भ में लाए जाने वाले संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करेगी. क्योंकि यह हमारी पार्टी की सबसे पहले और सबसे पुरानी मांग है.”

मायावती के द्वारा सवर्णों को आरक्षण देने का समर्थन करना को आश्चर्य करने वाली बात नहीं है क्योंकि बीएसपी प्रमुख ने पहले भी ऐसी मांग सरकार से की है. इसके अलावा टीडीपी सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू तक आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग को आरक्षण देने की मांग करते रहे हैं.

बीजेपी सुप्रीमो मायावती अगड़ी जातियों के गरीबों को आरक्षण देने की मांग कर चुकी हैं और इसके लिए साल 2011 में उस वक्त के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र भी लिख चुकी हैं. अपने पत्र में मायावती ने लिखा था कि सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थाओं में गरीब सवर्णों को आरक्षण दिया जाए.

इसके अलाव पिछले दिनों माकपा नेता और केरल सरकार में मंत्री के. सुरेंद्रन ने आरक्षण को लेकर अपनी बात रखी थी और कहा था कि आरक्षण की व्यवस्था जाति के बजाय आर्थिक आधार पर होनी चाहिए. लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने भी अपने विचार रखते हुए कहा था कि “गरीबी की एक ही जाति होती है. हम लोग 15 फीसदी की मांग कर रहे थे, लेकिन 10 फीसदी दिया गया. हम इस फैसले का स्वागत करते हैं.”

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