बुलंदशहर : उत्तर प्रदेश सरकार भले ही जेल की सुरक्षा औऱ वहां की व्यवस्था को लेकर तमाम दावे करती हो लेकिन बुलंदशहर जिला जेल लगता है सरकार के क्षेत्र से बाहर है, यहां सरकार का नहीं बल्कि नशे के सौदागरों का राज चलता है. नशे के जो पदार्थ बाहर आसानी से नहीं मिल सकते, वो जिला जेल में कुछ पैसे देकर आसानी से मिल जाते हैं और जेल प्रशासन शांत रहता है.
‘20 रुपए वाली टोरेक्स सीरप 200 में’
अपना उत्तर प्रदेश के संवाददाता से बात करते हुए जेल के पूर्व कैदी ने जेल के अंदर के कई राज उजागर किये, नाम और पहचान ना उजागर करने की शर्त पर पूर्व कैदी ने बताया कि जेल के अंदर मेडिकल स्टोर है जहां कई नशीले पदार्थ उपलब्ध रहते हैं, पूर्व कैदी ने बताया की जेल के अंदर सैकड़ों कैदी मेडिकल से नशीली दवाइयों का सेवन करते हैं. जो टेरेक्स की सीरप बाजार में 20 से 25 रुपए में उपलब्ध है उसे मेडिकल स्टोर के कर्मचारी 200 रुपए में बेचते हैं और मुनाफा कुटते हैं और ये सब जेल प्रशासन की नाक के नीचे होता है. बता दें टोरेक्स खांसी की सीरप है जिसमें कुछ हद तक नशीला पदार्थ मिलाया जाता है ताकि रोगी को आराम मिल सके, मगर नशेबाज नशे के लिए टोरेक्स का सेवन करते हैं
‘जेल कर्मी खुद लाते हैं नशीले पदार्थ’
पूर्व कैदी ने बताया कि जेल के अंदर मौजूद जेल कर्मी पैसे कमाने के चक्कर में खुद कैदियों को नशीले पदार्थ उपलब्ध करवाते हैं, कैदी ने यहां तक बताया कि जो गोली मार्केट में 10 रुपए की 12 गोलियां आती है वो जेल मेडिकल स्टोर से 100 रुपए में दी जाती हैं. इतना ही नहीं कैदी ने बताया कि जेल के अंदर मोबाइल का इस्तेमाल खूब होता है, मगर प्रशासन मुंह बंद किये रहता है.
नियमों की होती है अनदेखी
बातचीत में पूर्व कैदी ने बताया की जेल के अंदर कैदियों के अधिकारों की अनदेखी की जाती है, पुलिस बेरहमी से कैदियों के साथ बर्ताव करती है, बेरहमी से पिटती है कई बार तो 6-6 पुलिस कर्मी इकलौते कैदी को जमकर पीटते हैं औऱ अपनी भड़ास मिटाते हैं, पूर्व कैदी का कहना है कानून ने जेल भेजकर उन सैकड़ों कैदियों को उनके जुर्म की सजा दी है मगर पुलिस की मनमर्जी उनका बेवजह पीटना कैदियों को मिले अधिकारों को कूचलता है.
Note- जेल प्रशासन का वर्जन लेने के बाद खबर को अपडेट किया जाएगा
