बुलंदशहर : दिल्ली से 70 किलोमीटर दूर बुलंदशहर किसी ना किसी विवाद की वजह से सुर्खियों में छाया रहता है फिर चाहें वो हाईवे पर गैंगरेप की वारदात हो या फिर गोहत्या के शक में हुई हिंसा, लेकिन इस जिले की एक बात आम ही की यहां हमेशा बीजेपी का गढ़ रहा है.बीते लोकसभा चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी भोला सिंह ने मोदी लहर में प्रचंड जीत हासिल की थी, उन्हें करीब 60 फीसदी वोट हासिल हुए थे. बुलंदशहर आरक्षित सीट है.
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क्या है बुलंदशहर की राजनीतिक पृष्ठभूमि
पहले आम चुनाव से ही बुलंदशहर लोकसभा सीट महत्वपूर्ण मानी जाती है, पहले 5 चुनाव में ये सीट कांग्रेस के पास रहीं उसके बाद इमरजेंसी के बाद यहां की जनता ने कांग्रेस का साथ छोड़ दूसरी पार्टीयों का दामन थाम लिया, साल 1977 के चुनाव में यहां भारतीय लोक दल की जीत हुई वहीं 1980 में जनता दल की…लेकिन इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एक बार फिर ये सीट कांग्रेस के पास चली गई और 1984 में हुए आम चुनाव में यहां कांग्रेस जीती. 1989 के बाद से लगातार यहां कांग्रेस वापसी के लिए तरस रही है. 1989 चुनाव में जनता दल के जीत दर्ज करने के बाद 1991 से लेकर 2004 तक लगातार पांच बार भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव जीता. इस दौरान 1991 से 1999 तक बीजेपी के छतरपाल सिंह ने अपना दबदबा इस सीट पर बनाए रखा. 2009 में यहां समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार ने बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन 2014 में उत्तर प्रदेश में चली मोदी लहर का असर यहां भी दिखा.
क्या है बुलंदशहर सीट का समीकरण ?
2014 के अनुसार इस सीट पर कुल 17 लाख से अधिक वोटर हैं.जिसमें 9 लाख से अधिक पुरुष और करीब 8 लाख महिला वोटर हैं. बुलंदशहर जिले में करीब77 फीसदी हिंदू जनसंख्या और 22 फीसदी मुस्लिम जनसंख्या हैं, हालांकि मुस्लिम आबादी जिस हिस्से जाती है उसकी जीत के उम्मीद बढ़ जाती है,
5 विधानसभा सीटों पर बीजेपी
जिले में 5 विधानसभा सीट हैं, जिसमें सभी सीट बीजेपी के खाते में हैं.. 2017 में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में सभी पांच सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थीं.
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2014 का चुनाव कैसा रहा
देश की तरह इस जिले में भी 2014 का चुनाव में मोदी लहर थी, लिहाजा बीजेपी के भोला सिंह को रिकॉर्ड वोट हासिल हुए, बीते चुनाव में करीब 10 लाख वोट पड़े थे जिसमें 6 लाख यानि 60 फीसदी वोट बीजेपी को हासिल हुए.
