फिल्म ‘काली’ पर कलह, LGBT का झंडा और सिगरेट पीते दिखाया, FIR दर्ज!

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लखनऊ/दिल्ली: पैगंबर पर टिप्पणी को लेकर हो रहे घमासान का समाधान हो नहीं पाया है कि, एक और विवाद ने सिर उठा लिया है. अब इसे अभिव्यक्ति के नाम पर आजादी कहें या अभिव्यक्ति के नाम पर अधर्म. क्योंकि, प्रचार और प्रसिद्धि पाने के लिए जब भी किसी के जज्बात जोर मारते हैं, वो धार्मिक प्रतीकों की पताका को विवादित रंग में फहरा देता है और लगातर बढ़ता ही जा रहा है धर्म के अपमान का ये सिलसिला. नया विवाद मां काली के किरदार तक जा पहुंचा है।

क्या है ‘काली’ का विवाद?
दरअसल, मां काली के नाम पर की गई इस काली करतूत में, काली के एक हाथ में सिगरेट तो दूसरे हाथ में एलजीबीटी समुदाय का सतरंगा झंडा दिखाया गया है. जिस पर बड़ा विवाद हो रहा है. कनाडा फिल्म फेस्टिवल के लिए फिल्म मेकर लीना मणिमेकलई ने 2 जुलाई को इस डॉक्यूमेंट्री का पोस्टर जारी किया था. डॉक्यूमेंट्री के पोस्टर में देवी का यह रूप देख हर कोई हैरान रह गया. सियासी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक शोर मच गया।

विरोध में उतरे संत
सोशल मीडिया से लेकर साधू-संत तक, काली पर इस तरह की करतूत के विरोध में मुखर हुए हैं. कई सूबों में सड़कों पर उतरे लोग इसे देश और धर्म के खिलाफ साजिश बता रहे हैं. वहीं डायरेक्टर लीना मणिमेकलई पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने को लेकर गिरफ्तारी की मांग भी जोर पकड़ रही है. यूपी और दिल्ली में एफआईआर दर्ज की गई है।

कब लगेगी लगाम?
धर्म तो खुद अभिव्यक्ति का वाहक रहा है, लेकिन एम.एफ हुसैन से लेकर लीना तक, अभिव्यक्ति के वाहकों ने धर्म को ही ओछी प्रसिद्धी का धंधा बना लिया है. कभी फिल्म तो कभी बयान, आए गिन कोई ना कोई किसी ना किसी धर्म पर बेतुका कारनामा कर ही देता है. इस सबके बीच सवाल ये है कि, क्या फिल्म काली बहाना और धर्म को नीचा है दिखाना.आखिर कब तक चलेगा अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर ये तमाशा, कब लगेगी लगाम?

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