नई दिल्ली : यह बात जगज़ाहिर है कि दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री केजरीवाल और केन्द्र की सत्ता पर बैठी भाजपा की सरकार के बीच में आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहता है. अभी हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गंगा की सफाई के लिए पिछले चार महीने से अनशन पर बैठे संत गोपालदास को केंद्र सरकार ने संदिग्ध हालत में एम्स से गायब करवा दिया है.यह आरोप किस हद तक सही है इसका तो उन्होंने कोई प्रमाण नहीं दिया.
मुख्यमंत्री केजरीवाल ने अपने ट्वीट में लिखा कि संत गोपाल दास गौ-रक्षा और गंगा सफ़ाई के लिए अनशन पर थे. उनको मोदी सरकार ने एम्स से ग़ायब कर दिया है. उनके पिता को भी केंद्र सरकार नहीं बता रही कि उनको कहां ले गए. संत गोपाल दास असली गौ-रक्षक हैं.क्या उनके साथ मोदी सरकार का ऐसा बर्ताव उचित है? उन्हें जहां भी रखा गया है वहां से तुरंत रिहा किया जाये.
इसी बारे में आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भर्ती ने भी एक टवीट करते हुए लिखा है कि जो आखिरी चिठ्ठी संत गोपालदास जी अपने पिता को लिखी है.इसमें उन्होंने साफ-साफ कहा है कि केंद्र सरकार को उनके दिल्ली में होने में तकलीफ़ है.सरकार उनको कहीं दूर डालना चाहती है.इससे ज्यादा सबूत और क्या चाहिए?पहले मोदी जी ने मां गंगा के प्रति छलावा करके प्रो अग्रवाल को निशाना बनाया.और अब संत गोपालदास? अब और क्या चाहती है सरकार?
इस मामले में बताया जाता है कि गोपालदास से जब उनके पिता शमशेर मिलने पहुंचे तो वह बुधवार सुबह वॉर्ड में नजर नहीं आए. जिसके बाद उन्होंने पुलिस को संत गोपालदास की गुमशुदगी की सूचना दी. बाद में संत गोपालदास को एक बार देहरादून के एक अस्पताल में भेजने की बात कही गई और दूसरी बार भोपाल एम्स में भेजे जाने की. हालांकि सोमनाथ भारती ने एक कथित चिट्ठी को टवीट किया. जिसमें संत गोपालदास अपने पिता को संबोधित करते हुए लिख रहे हैं कि केंद्र सरकार उनके अनशन से परेशान है और वह दिल्ली से दूर उनको किसी कोने में भेजना चाहती है. खेर एफआईआर दर्ज़ की जा चुकी है और पुलिस जांच कर रही है.यह जांच में पता चलेगा कि मामले में हुआ क्या और मुख्यमंत्री का आरोप किस हद तक सही या गलत है?
