गौतमबुद्ध नगर सीट फिर जाएगी बीजेपी के कब्जे में या गठबंधन मारेगा बाजी

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नई दिल्ली : चुनावों का ऐलान हो गया है, ऐसे में देश की वीवीआईपी सीटों पर सबकी नजर गढ़ चुकी है, गौतमबुद्ध नगर की लोकसभा सीट भी वीवीआईपी सीटों में गिनी जाती है लिहाजा इस सीट का गणित क्या कहता है, किसके पक्ष में यहां की जनता है, क्या है यहां का सियासी गणित, इस रिपोर्ट के जरीए समझिए

मायावती शासन में बदला गौतमबुद्ध नगर

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में गौतम बुद्ध नगर का विस्तार हुआ, जिसके बाद से ही ये क्षेत्र हमेशा सुर्खियों में रहा है. इस सीट पर गुर्जर समाज के वोटरों की संख्या अधिक है, ऐसे में लोकसभा चुनाव में इस सीट पर सभी की नजरें हैं. 2015 में हुए दादरी कांड के दौरान इस क्षेत्र ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं.

गौतमबुद्ध नगर सीट का सियासी इतिहास

साल 2008 में परिसीमन के बाद सीट अस्तित्व में आई. 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में पहली बार यहां वोटिंग हुई, इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की. बसपा के सुरेंद्र सिंह ने महेश शर्मा को 2 लाख के अंतर से मात दी थी. मगर 2014 के हुए चुनाव में मोदी लहर के चलते बीजेपी प्रत्याशी महेश शर्मा को फायदा हुआ और महेश शर्मा ने यहां से पौने तीन लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज कर आए.

2015 में आया सुर्खियों में

साल 2015 में हुए दादरी कांड ने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी. दरअसल, बीफ के शक में दक्षिणपंथी विचार धारा के लोगों ने  दादरी के मोहम्मद अखलाक की हत्या कर दी गई, ये मसला राजनीतिक तौर पर काफी गर्माया था.

क्या कहता है सीट का समीकरण

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बड़ी सीटों में शामिल गौतमबुद्ध नगर में 2014 में वोटरों की संख्या 19 लाख से अधिक थी. जिनमें 11 लाख पुरुष, 8 लाख महिला वोटर थे. 2014 में यहां 60 फीसदी मतदान ही हुआ था. इनमें से 3837 वोट NOTA में गए थे. इस लोकसभा क्षेत्र में 80 फीसदी हिंदू जनसंख्या हैं, इनमें से 20 से अधिक प्रतिशत गुर्जर समाज से आते हैं. जबकि 14 फीसदी जनसंख्या मुस्लिम समुदाय से है.

2014 औऱ 2017 में चला बीजेपी का जादू

इस क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें नोएडा, जेवर, सिकंदराबाद, दादरी और खुर्जा शामिल हैं. 2017 के दौरान उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में ये सभी पांच सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थीं.वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के महेश शर्मा ने जीत दर्ज की थी, महेश शर्मा मोदी सरकार में मंत्री भी हैं लिहाजा उनके सामने वापस से जीत दर्ज करने की चुनौती होगी

 

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