नई दिल्ली : आज पूरे देश में गुरु नानक जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है. इस दिन को नानके जी के जन्मदिन के रुप में मनाया जाता है. गुरु नानक देव ने सिख धर्म की स्थापना की थी औऱ समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर किया. जिसके लिए उन्होंने अपने पारिवारिक जीवन औऱ सुख को भी त्याग दिया. नानक जी ने लोगों के मन में बसी कुरीतियों को निकाले के लिए दूर-दूर तक यात्रा की. हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा को इनका जन्मदिन प्रकाश पर्व के रुप में मनाया जाता है.
गुरु नानक देव जी का जन्म रावी नदी के किनारे तलवंडी नामक गांव में कार्तिक पूर्णिमा के दिन खत्रीकुल में हुआ था. प्रचलित तारीख के अनुसार नानक जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा का माना जाता है जोकि अक्टूबर-नवंबर में दीवाली के 15 दिन बाद पड़ती है. नानक जी के पिता का नाम कल्याणचंद या मेहता कालूजी था और माता का नाम तृप्ता देवी था. नानक जी की बहन का नाम नानकी था. वहीं तलवंडी का नाम भी आगे चलकर नानक जी के नाम पर ननकाना पड़ गया.
गुरु नानक देव जी बचपन से ही बहुत बुद्धिमान थे और उनमें सांसारिक विषयों को लेकर कोई खास लगाव नहीं था. तभी उन्होंने 8 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया था क्योंकि इनके प्रश्न के आगे अध्यापक भी हार जाते थे. इसके बाद नानक जी अपना समय आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग को देने लगे. गांव के लागों ने जब एक छोटे बालक में ईश्वर के प्रति इतनी आस्था देखी तो लोग उन्हें दिव्य मानने लगे. यहां तक कि गांव के मुखिया भी इनमें आस्था रखने लगे. नानक जी की बहन उन्हें बहुत प्यार करतीं थीं और उनमें गहरा विश्वास रखती थीं. एक बार बालक नानकजी सो रहे थे. सोते समय सूरज की तपिश से उनकी नींद न टूटे इसलिए सांप ने अपने फन से नानक जी के सिर पर अपनी छाया कर ली.
सोलह साल की उम्र में नानक जी का विवाह गुरदासपुर के लाखौकी नामक स्थान के रहने वाले मूला की कन्या सुलक्खनी से हुआ था. 32 वर्ष की आयु में इनके पहले पुत्र श्रीचंद का जन्म हुआ और चार साल बाद दूसरे पुत्र लखमीदास का जन्म हुआ. दोनों बेटों के जन्म के बाद सन् 1507 में नानक अपने परिवार का भार अपने श्वसुर पर छोड़कर मरदाना, लहना, बाला और रामदास इन चार साथियों को लेकर तीर्थयात्रा पर निकल गए. नानक जी ने भारत वर्ष में ही नहीं बल्कि अरब, फारस और अफगानिस्तान के कुछ क्षेत्रों की यात्राएं भी कीं.
कैसे मनाई जाती है गुरु नानक जयंती.
गुरु नानक जयंती के दिन नानक जी की दी गई शिक्षाओं को याद किया जाता है. इस दिन देशभर में तरह-तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया जाता हैं. इश दौरान कई स्थानों पर अखंड पाठ भी किया जाता है जोकि 48 घंटे तक चलता है. इस अखंड पाठ में गुरु ग्रंथ साहिब के प्रमुख अध्यायों का पाठ किया जाता है. वहीं जयंती से एक दिन पहले सिख समुदाय के लोग नगर कीर्तन भी करते हैं.
