कौन हैं गोपाल कांडा ? जिसने बचाई खट्टर सरकार, दिलचस्प है कहानी

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नई दिल्ली : हरियाणा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं, बीजेपी 40 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी तो बनी है मगर बहुमत ना होने की वजह से अकेले सरकार बनाने में सक्षम नहीं, लेकिन सिरसा से विधायक  गोपाल कांडा ने बीजेपी को समर्थन देकर सरकार बनाने की राह आसान कर दी है, गोपाल कांडा के साथ 6 और निर्दलिय विधायक बीजेपी को बिना शर्त समर्थन देने को राजी हो गए हैं, जिससे उम्मीद  है खट्टर सरकार फिर से हरियाणा में बनने जा रही है

कौन है गोपाल कांडा

गोपाल कांडा के सफर की शुरुआत जूते की एक दुकान से हुई, शुरुआत में गोपाल कांडा मामूली इंसान था, लेकिन साल 1996 में उन्होंने प्रॉपर्टी के कारोबार में कदम रखा और उसके बाद कामयाबी कदम चूमती चली गई. 15 साल में वह फर्श से अर्श तक जा पहुंचे. हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल के मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला का साथ दे चुके कांडा ने 2004 में पलटी मारी और कांग्रेस की सरकार बनते ही उसके पाले में आ गए.

मंत्री बनकर कारोबार बढ़ाया

कांग्रेस सरकार में कांडा मंत्री बने. इसके बाद उनका कारोबार दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करता चला गया. इस बीच उन्होंने एमडीएलआर एयरलाइंस शॉपिंग मॉल और गोवा के होटल में कैसीनो, स्कूल, यूनिवर्सिटी और न्यूज चैनल चलते रहे। दौलत के साथ-साथ सियासी हैसियत भी बढ़ती चली गई और दबंगई इस कदर बढ़ गई कि संपत्ति की जांच करने आए आयकर विभाग के अफसरों तक को पीट दिया.

महलनुमा घर के मालिक

कभी उनकी जूते की छोटी सी दुकान हुआ करती थी. लेकिन आज की तारीख में उनके पास ऐसा किलानुमा महल है, जिसकी कीमत 100 करोड़ के आसपास है. सिरसा−अलेनाबाद हाइवे पर ढाई एकड़ में फैला महलनुमा घर प्रतीक है हरियाणा में गोपाल कांडा की हैसियत का. घर की चारदीवारी के भीतर हैलीपैड बना है. महल की चारदीवारी ग्रीन बेल्ट में पड़ती है. लेकिन टाउन एंड कंट्री प्लानिंग महकमे का नोटिस भी इसकी एक ईंट तक नहीं हिला पाया.

विवादों से रहा पुराना नाता

गोपाल कांडा का नाता विवादों से जुड़ा रहा है फिर चाहे वो गीतिका शर्मा आत्महत्या मामला हो या फिर नवंबर, 2010 में कांडा की कार में हुआ गैंगरेप. अप्रैल, 2010 में सिरसा में सरेबाजार इनेलो  नेता की पिटाई भी की. इसके बाद कार ओवरटेक के ‘जुर्म’ में क्रिकेटर अतुल वासन को भी बुरी तरह पीटा गया, लेकिन कांडा पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.15 साल की उम्र में 12 क्लास में फेल होने के बाद गोपाल कांडा ने जूते की छोटी सी दुकान खोली थी. मगर आज हैसियत के दम पर  वो सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं

 

 

 

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