लखनऊ : पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य उत्तर प्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश की परिधी में चल रहा लोकसभा चुनाव. अब पूरब की पिच पर आ खड़ा हुआ है.पांचवें चरण के मतदान के बाद सब छठे और सातवें दौर के लिए सभी अपनी अपनी फील्डिंग सजाने में लगे हैं. क्योंकि अब फाइनल मैंच पूर्वांचल में ही होना है.
कितनी सीटें और किसकी कितनी तैयारी
छठे और सातवें चरण में यहां 27 सीटों पर संग्राम है. आखिरी दौर के इस दंगल में सभी दल शिद्दत से दम लगा रहे हैं. गठबंधन की संयुक्त रैलियों का रेला चल रहा है. कांग्रेस प्रभारी प्रियंका गांधी का धुआंधार प्रचार और पूरब में पीएम की रैलियों का रेला भी जोरों पर है, सीएम योगी भी शिद्दत से जुटे हैं.
कठिन परीक्षा की प्रयोगशाला पूरब
पक्ष-विपक्ष के लिए यक्ष प्रश्न सरीखा है पूर्वांचल. वाराणसी की वजह से पीएम के कंधों पर पूर्वांचल को बोझ थोड़ा ज्यादा है.बीजेपी की कोशिश है कि, पीएम के संसदीय क्षेत्र के प्रभाव के चलते पूर्वांचल की बाकी सीटों पर भी लाभ उठाया जाए. वहीं गोरक्षप्रांत जिसमें सीएम योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर चुनाव है. लिहाजा इस क्षेत्र को साधान सीएम योगी के जिम्मे हैं.गोरखपुर के अलावा जो 13 सीटें हैं उन पर सीएम योगी का इम्तिहान तब और बड़ा हो जाता है जब उपचुनाव में गोरखपुर और फुलपुर सीट गठबंधन के खाते में चली गई हो. प्रियंका गांधी के प्रभार की असली परीक्षा भी पूरब में ही है क्योंकि, प्रियंका गांधी को जब कांग्रेस का महासचिव बनाया गया तब उनको पूर्वांचल का विशेष प्रभारी बनाया गया था. सपा-बसपा के गठबंधन का कड़ा इम्तिहान भी पूर्वांचल में होना है, दरअसल सपा-बसपा के गठबंधन के अंकुर इसी पूरब की जमीन पर फूटे थे. सपा-बसपा के गठबंधन ने गोरखपुर फूलपुर जीतने के बाद पूरे यूपी में गठबंधन किया है ऐसे में गठबंधन को वोट के गणित को भी यहीं परखा जाएगा.
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बीते चुनाव में पूरब में कौन कहां था
2014 के चुनाव में यहां चारों ओर कमल खिला था.27 में से 25 सीटें बीजेपी ने जीती थीं और 2 सीट पर उसके सहयोगी अपना दल को मिली थीं. लेकिन इस बार बीजेपी के लिए बागी राजभर भी राह में रोड़े बिछाने में लगे हैं.राजभर ने करीब 39 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. ऐसे में बीजेपी के सामने पुराने प्रदर्शन को दोहराना बड़ी चुनौती है. 2014 में पूरब की 11 सीटों पर बसपा दूसरे नंबर पर रही थी.पूरब में दलित वोटों का बड़ा समूह है ऐसे में बसपा के अलावा पिछड़े वोटों की बिसात पर सपा सियासी ताकत परखी जाएगी. पूरब की 27 सीटों में से 16 पर बसपा और 11 पर सपा के प्रत्याशी हैं.
पूरब में जातियों का गणित
पूरब की पिच पर जीत का झंडा फहराने के लिए जातियों पर भी जोर दिखाया जा रहा है. दलित-पिछड़ा वोट यहां किसी का बी केल बनाने और बिगाड़ने का माद्दा रखते हैं. बीजेपी गैर दलित और गैर जाटव के जरिए जीत की जुगत में हैं. तो वहीं सपा-बसपा दलित और पिछड़े समीकरण को सिद्ध करने में लगे है. कांग्रेस सवर्ण और ब्राह्मण वोटों के जरिए हाथ मजबूत करने की कोशिश कर रही है.एक समय में कांग्रेस का यहां बड़ा बोलवाला था.2009 के चुनाव में यहां कांग्रेस अच्छी स्तिति में थी. एक बार फिर पूरब की पिच पर होने वाले आखिरी मैच के लिए किसकी फील्डिंज टाइट सजी है.
