मिसाल : तीन पीढ़ियों से रामलीला का मंचन कर रहा है ये मुस्लिम परिवार, कंठस्थ है रामायण की चौपियां

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लखनऊ : नवरात्र की शुरुआत होते ही देश के तमाम शहरों में रामलीला का मंचन भी शुरू हो गया हैं. दिल्ली में लवकुश रामलीला हर किसी की जुबान पर चढ़ी हुई है तो वहीं, नवाबी शहर लखनऊ में एक मुस्लिम परिवार की रामलीला का हर शख्स दीवाना होता जा रहा है. दरअसल, लखनऊ के बख्शी का तालाब इलाके में एक मुस्लिम परिवार की ओर से पिछली तीन पीढ़ियों से रामलीला का मंचन किया जा रहा है.

खास बात ये है कि रामलीला के मंचन में नाटक के डायरेक्टर मौहम्मद साबिर खान भी मुख्य रुप से भाग लेते हैं. वह 1972 से ही इस प्ले का हिस्सा बनते आ रहे हैं. साबिर का कहना है कि जब 1972 में इस रामलीला की शुरुआत हुई थी, तब हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग सामान्य तौर पर इसमें हिस्सा लेते थे. उन्होंने कहा कि जब वह 13 साल के थे, तभी से इसका हिस्सा बन रहे हैं और उन्हें इसके मंचन में मजा भी आने लगा है.

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हिंदू और मुस्लिम को अलग-अलग नहीं बनाया….
रामलीला का मंचन करने पर साबिर का कहना है कि भगवान या अल्लाह ने हिंदू और मुस्लिमों को अलग-अलग नहीं बनाया है. हिंदू हो या मुस्लिम है तो एक ही ईश्वर की संतान.

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अरबाज निभाते हैं लक्ष्मण का किरदार
आज साबिर के लड़के सलमान और अरबाज जहां राम और लक्ष्मण का रोल अदा करते हैं तो उनके दूसरे बेटे शेरखान जनक और नवासा साहिल बचपन के राम का अभिनय करते थे. रामायण की चौपाइयां हों या कुरआन की आयतें साबिर दोनों ही पूरी तन्मयता से पढ़ते हैं. साबिर की तरह की उनके बेटे और पोतों का कहना है कि रामलीला का मंचन करने में उन्हें मजा आता है और वह इससे काफी खुश होते हैं.

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