नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार ने दांव खेला है. एससी एसटी को तो पिछले साल खुश कर ही चुकी है लेकिन सवर्णों के वोट भी हाथ से जाने नहीं देना चाहती. चुनाव से महज कुछ ही दिन पहले सवर्णों के आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दे दिया. दरअसल, इस नए साल की शुरुआत में ही मोदी ने दांव खेला है और साल की पहली कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला लिया.
मोदी सरकार पिछड़े सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण के प्रावधान पर मुहर लगा दी. इसके लिए संविधान में संशोधन की तैयारी भी शुरू कर ली गयी है. आज इस बिल को पारित कराने के लिए लोकसभा में पेश किया जाएगा. लोकसभा में पारित होने के बाद ही इस बिल को राज्यसभा और उसके बाद राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.
किस आधार पर मिलेगा आरक्षण?
इसके आलावा इस बात को भी जान लेना चाहिए कि किन सवर्णों को आरक्षण के दायरे में रखा गया है क्योंकि खबर आ रही है कि हर एक सवर्ण को आरक्षण नहीं दिया जाएगा. पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने के लिए सरकार ने कुछ नियम और दायरे स्थापित किए है. उसी के तहत आरक्षण देने का प्रावधान है. बता दें कि सिर्फ उन्हीं सवर्णों को मिलेगा जिनकी वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होगी और उनको जिनके पास 5 एकड़ से कम जमीन होगी. EWS कैटेगरी को जनता के सामने स्पष्ट कर दी जाएगी. मतलब ये कि आरक्षण का लाभ किसे मिलेगा और किसे नहीं ये निर्धारित कर दिया गया है.
इन्हें ही मिलेगा आरक्षण
- 8 लाख से कम होनी चाहिए आमदनी
- कृषि भूमि 5 एकड़ से कम होनी चाहिए
- 1000 स्क्वायर फीट से कम क्षेत्र में बना हो घर
- निगम में आवासीय प्लॉट होने पर उसका दायरा 109 यार्ड से कम जमीन में हो
- निगम से बाहर अगर प्लॉट है तो वह 209 यार्ड से कम जमीन में ही होनी चाहिए
- संविधान में संशोधन के बाद ही मिलेगा आरक्षण
केंद्र सरकार ने फिलहाल आरक्षण का फैसला तो ले लिया है जो उसका सियासी स्टंट माना जा रहा है. सरकार सवर्ण आरक्षण आर्थिक स्थिति के आधार पर लने के लिए नियमों और दायरों को तैयार कर रही है, लेकिन इस तरह के आरक्षण का अभी संविधान में व्यवस्था नहीं है इसी वजह से सरकार को आरक्षण लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करना होगा. संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में बदलाव लाया जाएगा. दोनों अनुच्छेद में बदलाव कर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का कदम उठाया जा रहा है.
