कानपुर : यूपी एसटीएफ की टीम विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर ले जा रही थी. शहर से 17 किमी पहले बर्रा थाना क्षेत्र में सुबह 6:30 बजे काफिले की एक कार पलट गई. विकास दुबे उसी गाड़ी में था. गैंगस्टर विकास दुबे ने पुलिस से पिस्टल छीनकर हमला करने की कोशिश की. जवाबी कार्रवाई में उसे तीन गोलियां लगी और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई. सुबह 7 बजकर 55 मिनट पर मृत घोषित कर दिया गया. विकास दुबे को तीन गोली छाती में और एक बांह में लगी.
पुलिस पर भी उठ रहे सवाल
कानून के जानकारों का कहना है कि कानून में एनकाउंटर जैसा कोई शब्द नहीं है. कानूनन यह एक हत्या है. एफआईआर होगी. लोगों को गलतफहमी है कि पुलिस एनकाउंटर कर बच जाती है. ऐसे दसियों मामले हैं जहां फेक एनकाउंटर में पुलिसकर्मियों को सजा मिली है. पुलिस को एनकाउंटर में किसी को मार देने की छूट नहीं है. इसे भी हत्या की तरह ही ट्रीट किया जाता है.
दर्ज होगा पुलिस पर केस
केस दर्ज होगा और स्वतंत्र पुलिस अधिकारी जांच करेंगे. जांच में ही यह स्पष्ट होगा कि पुलिसकर्मियों ने आत्मरक्षा के अधिकार के तहत अपराधी पर गोली चलाई है या फेक एनकाउंटर किया है. फिलहाल इस मामले में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. एनकाउंटर हुआ है, सही है या फेक, जांच के बाद ही स्पष्ट होगा. राइट फॉर प्राइवेट डिफेंस यानी आत्मरक्षा के अधिकार के तहत उन्हें अपनी कार्रवाई को जायज ठहराना होगा. इसके अलावा, विकास दुबे का कोई रिश्तेदार किसी थाने में हत्या की एफआईआर दर्ज करवा सकता है.
