दिल्ली: केंद्र सरकार ने PFI यानि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया नाम के संगठन पर 5 साल के लिए बैन लगा दिया है. वहीं PFI पर लगे 5 साल के प्रतिबंध के बाद अब सियासी गलियारों से लेकर मजहबी इदारों तक, राजनेताओं से लेकर मुस्लिम धर्मगुरुओं तक PFI पर प्रतिबंध के विरोध में तर्क-वितर्क और कुतर्क किए जा रहे हैं. AIMIM प्रमुख ओवैसी ने कहा कि, हम PFI की विचारधारा के खिलाफ हैं लेकिन बैन के पक्ष में नहीं है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में ये तानाशाही है आखिर दक्षिणपंथी संगठनों पर प्रतिबंध क्यों नहीं?
PFI पर बैन के कारण?
22 और 27 सितंबर को NIA, ED और राज्यों की पुलिस ने PFI पर 8 सूबों में सर्जिकल स्ट्राइक सरीखी छापेमारी की थी…पहले राउंड की छापेमारी में 106 PFI और दूसरे राउंड की छापेमारी में 247 PFI से जुड़े लोग हिरासत में लिए गए…जांच एजेंसियों को PFI के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले…इसके आधार पर गृह मंत्रालय ने PFI पर बैन लगाने का फैसला किया ।
PFI पर क्याआरोप?
तेलंगाना में कराटे ट्रेनिंग से लेकर हथियार चलाने की ट्रेनिंग के आरोप, PFI पर देश के कई हिस्सों में दंगों की फंडिंग और देश विरोधी गतिविधियों के साथ-साथ 2047 तक गजवा-ए-हिंद जैसे आरोप हैं ।
विपक्ष ने बैन पर सवाल उठाए, संघ पर बैन की दलील
कांग्रेस सांसद ने कोडिकुन्नील सुरेश से लेकर राशिद अल्वी तक, दिग्विजय सिंह से लेकर, सपा वाले एसटी हसन और बर्क तक सभी का तर्क है कि, PFI पर बैन क्यों? इधर बड़े दिन बाद मीडिया से मुखातिब हुए लालू यादव ने संघ पर प्रतिबंध का मुद्दा उछाल दिया ?
PFI पर बैन की लड़ाई, RSS पर क्यों आई.?
PFI के बैन पर विपक्ष के तमाम नेताओं ने PFI की तुलना संघ से की है. विपक्ष के सवाल पर बीजेपी नेताओं ने भी मोर्चा संभाला है. PFI पर लगे इस प्रतिबंध की अपने-अपने तरीके से व्याखा की जा रही हैं. सोशल मीडया पर भी संघ पर बैन को लेकर हैशटैग चलाया जा रहा है।
