लखनऊ : चुनावी माहौल आते ही सभी संगठनों और राजनीतिक दलों को भी मंदिर मस्जिद की याद आने लगती है. सभी राजनीतिक दल मंदिर और मस्जिद की आड में अपना अपना वोट बैंक साधने में लगे रहते हैं. ऐसे कई संगठन हैं जिन्होने बीजेपी सरकार से राम मंदिर निर्माण के लिए कानून की मांग कर रहे हैं.
आरएसएस भी कर चुका है मांग
आरएसएस के बाद अब बीजेपी के एक और सहयोगी संगठन विश्व हिन्दू परिषद ने भी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किये बिना संसद से क़ानून बनाए जाने की वकालत कर दी है.
और इंतजार नहीं कर सकते
वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि राम मंदिर का विवाद अड़सठ सालों से अलग – अलग अदालतों और आठ सालों से सुप्रीम कोर्ट में पेंडिग है. उन्होंने कहा कि बरसों से बाट जोह रहे रामभक्त अब मंदिर निर्माण के लिए कतई और इंतजार नहीं कर सकते, इसलिए केंद्र की मोदी सरकार को चाहिए कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किये बिना जल्द से जल्द संसद में क़ानून बनाकर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ़ कर दे. वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने इलाहाबाद में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि मोदी सरकार संसद के अगले सत्र में राम मंदिर निर्माण के लिए क़ानून ज़रूर बना देगी, क्योंकि यह मोदी सरकार राम भक्तों की सरकार है.
आलोक कुमार के मुताबिक़ अगर जनवरी महीने तक संसद से क़ानून बन गया तो प्रयागराज के कुंभ मेले में इकतीस जनवरी से शुरू हो रही वीएचपी की धर्म संसद में मंदिर निर्माण शुरू होने की तारीख का भी एलान कर दिया जाएगा. वहीं प्रवीण तोगडिया भी राम मंदिर कानून के माध्यम से बनाने की बात कर रहे हैं. अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इन संगठनों की तरफ ध्यान देती भी है या नहीं.
