नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता बहुत ही खराब स्तर पर पहुंच चुकी है. इसे देखते हुए विशेषज्ञों ने आगे और भी स्थिति खराब होने की चेतावनी दी है. बता दें राजधानी में चल रहे निर्माण, भारी तादाद में वाहनों के आवागमन और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटना से प्रदूषित होकर दिल्ली की वायु और भी जहरीली हो गई है. मानसूनी बारिश बंद होने के बाद से ही दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति लगातार और भी खराब होती जा रही है.
ये इलाके हैं सबसे ज्यादा प्रभावित
आपको बता दें कि दिल्ली में द्वारका सेक्टर-8, रोहिणी, आनंद विहार, पंजाबी बाग और नरेला में हवा की गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 400 से ज्यादा हो गया है. जो कि बेहद ही जानलेवा है. दिल्ली में शनिवार को भी औसतन हवा की गुणवत्ता सूचकांक 350 रहा है. पीएम 2.5 भी 400 से ज्यादा रिकॉर्ड दिल्ली के रोहिणी में किया गया है. वायु में अगले 2 दिनों में पीएम-10 और पीएम-2.5 के स्तर में बढ़ोतरी की वजह से और भी प्रदूषण बढ़ेगा. अगर जल्द ही हालत ठीक नहीं हुए तो इसका सीधा असर लोगों की दिनचर्या पर पड़ने लगेगा. इसके अलावा हो सकता है इस समस्या से निपटने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाना पड़े.
यह भी पढ़ें : खुले मंच पर बोले प्रवीण तोगड़िया ‘अबकी बार हिन्दू सरकार’, आज करेंगे पार्टी का ऐलान!
जानकारी दे दें कि बढ़ते हुए प्रदूषण की वजह से सड़कों पर सफर के दौरान खांसी और लोगों की आंखों में जलन की समस्या बढ़ने लगी है. वायु गुणवत्ता अगले कुछ दिनों में और भी खराब होने की आशंका जताई जा रही है. वायु गुणवत्ता सूचकांक शनिवार को 341 रहा. जबकि इससे एक दिन पहले इस सीजन के सर्वाधिक सूचकांक 361 के स्तर पर था. वहीं पंजाबी बाग में 434 सूचकांक सर्वाधिक था.
बढ़ती हुए प्रदूषण की समस्या को देखते हुए सीपीसीबी ने यह सिफारिशें की हैं कि दिल्ली में सभी निर्माण गतिविधियां 1 से 10 नवंबर के दौरान रोकी जाएं, निजी वाहनों का 10 नवंबर तक कम से कम इस्तेमाल करें, बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखें. जिससे डीजी सेट्स के संचालन की आवश्यकता न हो, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 4 से 10 नवंबर तक ट्रैफिक जाम न लगे. इसके साथ ही सीपीसीबी ने अपील की है कि सुबह और शाम के समय सैर करने से बचें. सीपीसीबी के पूर्व अधिकारी डी. शाह के अनुसार हवा की रफ्तार अगर तेज होती है तो प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी नहीं होगी.
