UPByPoll: आजमगढ़ (Azamgarh) और रामपुर (Rampur), सूबा-ए-उत्तर प्रदेश की राजनीति के ये वो दो रणक्षेत्र हैं. जहां बेहद दिलचस्प दंगल सजा हुआ है. दरअसल, इन दोनों जगहों पर ही उपचुनाव का घनघोर घमासान है. वहीं इस घमासान के आजमगढ़ (Azamgarh) वाले मैदान की बात करें तो बीजेपी ने भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ को फिर से उम्मीदवार बनाया गया है. निरहुआ के नामांकन में पहुंचे स्वतंत्र देव सिंह का दावा है कि, इस बार का दंगल हम ही जीतेंगे. प्रदेश की जनता विकास चाहती है।
आजमगढ़ में निरहुआ Vs धर्मेंद्र यादव
2019 में भी आजमगढ़ (Azamgarh) में कुछ इसी तरह का आलम था. बीजेपी ने अखिलेश यादव (Akhilehs Yadav) के सामने दिनेश लाल यादव निरहुआ (Dinesh lal Nirahua) को अपना उम्मीदवार बनाया था. अखिलेश यादव के सामने तब वो हार गए थे हालांकि, बदले हालात में इस बार उंची है निरहुआ के हौसले की उड़ान. नामाकंन के दौरान निरहुआ ने जनता से अपील करते हुए कहा कि, एक बार हमें मौका देकर देखें. काम ना करें तो 2 साल बोदा होने वाले लोकसभा चुनाव में हटा देना।
आजमगढ़ क्यों खास?
मुलायम सिंह के जमाने से ही समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाती है आजमगढ़ (Azamgarh) वाली सीट. 2014 मुलायम सिंह यहां से जीते थे तो वहीं 2019 में अखिलेश यादव (Akhilehs Yadav) यहां से सांसद बने. अब विधानसभा चुनाव के बाद अखिलेश यादव के इस्तीफे ये सीट खाली हो गई है. इश सीट से डिंपल यादव से लेकर सुशील आनंद तक कई नाम चर्चाओं में रहे और अब धर्मेंद्र यादव (Dharmendra Yadav) के नामांकन के बाद वोटों के समीकरण में गढ़ बचाने की जद्दोजहद शुरु हो गई है. क्योंकि, अखिलेश यादव (Akhilehs Yadav) के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है आजमगढ़. इस दौरान धर्मेंद्र यादव ने कहा कि, जनता इस सरकार से परेशान हैं।
रोचक हुआ रामपुर का रण…
सबकी नजरें रामपुर (Rampur) के रण पर जमी है. क्योंकि, रुठों को मनाने और रणनीतियों को रंग देने की जंग यहां सबसे ज्यादा रोचक है. आजम खान के जेल से आने के बाद यहां चुनावी संघर्ष और कठिन होता दिख रहा है. क्योंकि, रामपुर (Rampur)के रणक्षेत्र में बीजेपी ने जहां आजम खान के करीबी रहे घनश्याम लोधी पर दांव खेला है तो वहीं तमाम माथापच्ची और मंथन के बाद आजम खान ने जिस नाम का ऐलान किया है वो है आसिम राजा. घनश्याम पहले समाजवादी पार्टी में ही थे. आजम खान के करीबी रहे हैं. उन्ही ने उन्हें MLC बनवाया था चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी छोड़ वो बीजेपी में शामिल हो गए थे. अब बीजेपी ने उन्हें आजम खान के सामने ही उतार दिया है. यानि रामपुर में लड़ाई दोनों ओर से आजम खान के करीबियों में ही होगी.
किसकी प्रतिष्ठा का सवाल
उपचुनाव के इस दंगल से कांग्रेस ने किनारा कर लिया है. कांग्रेस ने रामपुर (Rampur) आजमगढ़ कही से भी कोई उम्मीदवार नहीं उताराहै. तो वहीं बसपा ने इस दंगल को थोड़ा दिलचस्प बना दिया है. क्योंकि, रामपुर में बसपा ने जहां कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है लेकिन आजमगढ़ में मुस्लिम प्रत्याशी गुड्डू जमाली को उतारकर समाजवादी पार्टी के मुस्लिम-यादव ( MY) समीकरण को बिगाड़ने की बिसात बहुत पहले ही बिछा रखी है. बता दें कि, इन दोनों सीटों पर 23 जून को मतदान है तो वहीं 26 जून को रिजल्ट आएगा. देखना दिलचस्प होगा कि, क्या अखिलेश बचा पाएंगे अपना गढ़ और क्या आजम जीत पाएंगे रामपुर का रण. क्योंकि, रामपुर में हार जीत का श्रेय जहां आजम खान को जाएगा, तो वहीं आजमगढ़ में हार-जीत, अखिलेश यादव (Akhilehs Yadav) के ही हिस्से आएगी और इन दोनों जगह पर बीजेपी के पास खोने को कुछ नहीं है सिवाए पाने को. कुल मिलाकर देखा जाए तो इस चुनाव में मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और भूतपूर्व मायावती की प्रतिष्ठा भी दांव पर है।
