लखनऊ: राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने कल यानि, 7 नवंबर(रविवार) को धरने का ऐलान किया है. परिषद का कहना है कि, तमाम जायज और मुख्य सचिव स्तर की बातचीत में गतिमान समस्याओं का निर्णय न हो पाने के कारण पूरे प्रदेश के समस्त जनपदों में सरकार का ध्यानाकर्षण आन्दोलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है. प्रथम चरण में एक सप्ताह तक सभी संवर्गो की समस्याओं के बावजूद उनके अधिकारियों द्वारा वार्ता न करने, समाधान लम्बित रहने तथा मुख्य सचिव स्तर के वार्ता के लिए तमाम कड़े निर्देशों का पालन कराने, वार्ता कर समस्याओं का निवारण कराये जाने के लिए समाधान पखवाड़ा मनाया गया. आन्दोलन के क्रम में 7 नवम्बर को राजधानी सहित प्रदेश के समस्त जनपदों में धरना प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए हर जनपद में पर्यवेक्षक की टीम की देखरेख में धरना एवं रैली की जाएगी।
कौन कहां संभालेगा कमान?
परिषद के मीडिया प्रभारी मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि, 7 नवम्बर की धरना रैली के लिए परिषद के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ अन्य घटक संघों के प्रान्तीय अध्यक्षों एवं महामंत्रियों को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।इस क्रम में हरिकिशोर तिवारी मेरठ, प्रेम कुमार सिंह कानपुर मण्डल, शिवबरन सिंह यादव लखनऊ, इं. एस.पी. मिश्रा हरदोई, संतोष कुमार तिवारी कानपुर देहात, श्रीमती रेनु शुक्ला रायबरेली, शैलेन्द्र प्रताप सिंह गोरखपुर, हेमन्त श्रीवास्तव बलरामपुर, जी.एन. सिंह बदायू, विवेक यादव ,बुलन्दशहर, सैयद आसिफ हसन मुरादाबाद, संजय सिंह वाराणसी, इं. राकेश कुमार त्यागी सहारनपुर,हौसला प्रसाद मिश्रा मिर्जापुर,ओ.पी. सिंह अयोध्या,संदीप सिंह बस्ती,राधारमण मिश्रा रामपुुर और सहजराम कनौजिया श्रावस्ती सहित समस्त मण्डल एवं जनपदों के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने पुरानी पेंशन बहाली सहित ग्यारह सूत्रीय मांगों को लेकर एक बार फिर आन्दोलन का रूख अख्तियार किया है। परिषद के नेताओं के अनुसार पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाली, राज्य कर्मचारियों को केन्द्र के समान भत्तों की मांग, पं. दीनदयाल उपाध्याय कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना एवं वेतन विसंगतियों का निस्तारण एवं शासनादेष के निर्देषानुसार सेवा संगठनों से नियमित बैठक करने व अन्य मांगों के समर्थन में जिलाधिकारी आवास/कार्यालय के सम्मुख शन्तिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया जायेगा, जिसमें परिषद से सम्बद्ध संगठनों के कर्मचारियों द्वारा भाग लिया जायेगा। धरने के उपरान्त जिलाधिकारी माध्यम से मुख्यमंत्री जी को सम्बोधित ज्ञापन प्रेषित किया जायेगा। परिषद का मांग-पत्र
1- राज्य कर्मचारियों को पूर्व में मिल रही पुरानी पेंशन व्यवस्था मूल रुप में बहाल की जाये।
2- राज्य कर्मचारियों और शिक्षकों के रोके गए तथा समाप्त किये गये महंगाई व अन्य भत्ते बहाल किए जायें।
3- विभागीय पदोन्नति किये जाते समय पोशक पद पर कार्यरत कार्मिक को पदोन्नति हेतु पात्र माने जाने एवं किन्तु विभागीय कार्यवाही प्रचलित होने के कारण पदोन्नति का पद नही दिया जाता है लेकिन पदोन्नति सवंर्ग में एक पद रिक्त रखा लिया जाता है, तथा परिणाम बन्द लिफाफा में रखा जाता है, ऐसी स्थिति में कार्मिक का एक साथ दो पदों पर धारणाधिकार रहता है। इस कारण जहां पोशक संवर्ग में एक पद तथा पदोन्नति संवर्ग में भी एक पद संरक्षित रहता है, इस विसंगति को दूर किया जाय।
4-कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू होने तथा अब उसका नाम पं0 दीनदयाल राज्य कर्मचारी कैषलेस योजना रखने की घोषणा के बावजूद उच्च सुविधा युक्त चिकित्सीय संस्थानों के साथ 07 वर्ष बाद भी शसकीय अनुबन्ध अभी तक नहीं हो सका। अविलम्ब अनुबन्ध करते हुए केशलेस चिकित्सा प्रारम्भ की जाये।
5-(अ) केन्द्रीय कर्मचारियों के भत्तों पर निर्णय हो जाने के पश्चात प्रदेश के कार्मिकों को भी केन्द्र के समान भत्ते प्रदान किये जायें तथा वेतन समिति द्वारा प्रस्तावित वेतन विसंगतियों दूर करते हुए निर्णय लागू किये जायें।
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6- फील्ड कर्मचारियों को उच्च स्तरीय समिति में तयसुदा मोटर साईकिल भत्ता स्वीकृत किया जाये।
7-(अ) वर्ष 2001 तक विनियमित किए गये कर्मचारियों की सेवा जोडकर पेंषन का लाभ दिया जाये तथा सग्रह अमीनों केा 2800 मूल वेतन प्रदान करते हुए सामयिक सेवाओं को जोड़कर सेवा लाभ दिया जाये साथ ही पूर्व में की गयी सेवाओं यथा तदर्थ, अंशदायी सामयिक, वर्कचार्ज, दैनिक वेतन, की अवधि को जोउ़कर पेंशन का लाभ प्रदान किया जायें।
8-(अ) संविदा/आउट सोर्सिंग के रुप में कार्य कर रहे कार्मिकों को निष्चित अवधि के बाद पूर्ण कालिक राज्य कर्मचारी घोषित किया जाय। समान/कार्य, समान योग्यता पर समान वेतन का सिद्धान्त लागू किया जाये। ठेकेदारी व्यवस्था मे भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है, इस व्यवस्था को समाप्त करके सीधी नौकारी के रास्ते खोलकर रोजगार देकर इन्हें समाहित किया जाये।
9- राज्य कर्मचारियों की 50 वर्ष की आयु पार कर लेने पर अनिवार्य सेवानिव्रत के मामले में पारदर्शिता के साथ मार्गदर्शन सिद्धान्तों को घोषित करते हुए पालन किया जाय। (कई उदाहरण परिसद के पास है, जिनमें मनमानापन किया गया है। इससे तमाम आन्दोलन एवं न्यायालयी विवाद उत्पन्न हो रहें हैं।
10- ‘‘विभागीय विवाद समाधान फोरम‘‘ को एक्टिव किया जाये। ताकि संगठनों की भूमिका के तहत कार्मिकों के न्यायालयी प्रकरणों का अतिसीघ्र निस्तारण हो सके।
11-(अ) वर्श-2013 में राज्य कर्मचारियों द्वारा की गई हड़ताल पर मा0 उच्च न्यायालय के समक्ष षासकीय सहमति के बावजूद ग्राम पंचायत सफाई कर्मी, राजस्व संग्रह अमीन, लिपिक संवर्ग एवं कैषलेस चिकित्सा सुविधा पर यथा आवष्यक आदेष तत्काल निर्गत किये जाये।
