संतान सुख के लिए इस विधि से करें मां स्कंदमाता (Skandmata) की पूजा (Puja)

मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप स्कन्दमाता की पूजा में लाल फूल, कुमकुम, चावल, फल और फूल आदि सामग्री को अर्पित करना चाहिए. मां के इस स्वरूप की पूजा भी देवी के अन्य स्वरूपों की तरह ही होती है. स्कन्दमाता की पूजा के वक्त इस मंत्र का ध्यान से उच्चारण करें. मंत्र- नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्। समग्रतत्वसागररमपारपार गहराम्॥

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आज है नवरात्र का दूसरा दिन, ऐसे करिए मां ब्रह्मचारिणी का प्रसन्न

मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या और उनके त्याग की देवी माना जाता है. मां ब्रह्मचारिणी श्वेत रंग के कपड़े पहनती हैं. वो अपने दांय हाथ में अष्टदल की माला और बांय हाथ में कमंडल लिए हुए हैं. शास्त्रों के अनुसार मां भगवती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजार वर्षों तक केवल फलों का और तीन हजार वर्षों तक केवल पेड़ों की पत्तियों का सेवन कर कठोर तपस्या की थी. माता की कठोर तपस्या के बाद उन्हें ब्रह्मचारिणी रूप की प्राप्ती हुई थी.

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अष्टमी के दिन मां दुर्गा बरसाएंगी इन राशिवालों पर अपनी कृपा, कार्यक्षेत्र में मिलेगी कामयाबी

कभी हमें सफलता मिलती है तो कभी दिन सामान्य गुजरता है. नवरात्र की अष्‍टमी और नवमी आज है. यह शुभ दिन कुछ राशिवालों के लिए अच्‍छा समय लेकर आया है. 

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इस राशि के सितारों की स्थिती है खास, मां कुष्मांडा होने वाली हैं मेहरबान

नई दिल्ली : नक्षत्र अपनी चाल हर समय बदलते हैं. इन नक्षत्रों का हमारे जीवन पर भी बहुत प्रभाव पड़ता है. ज्योतिष विज्ञान के अनुसार कौन सा ग्रह और नक्षत्र आपकी कुंडली के कौन से घर में जा रहा है, इसके मुताबिक आपका जीवन प्रभावित होता है. ग्रहों की रोज बदलती चाल के कारण ही हमारा […]

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मां दुर्गा के व्रत में नहीं होगी किसी तरह की परेशानी, इन बातों का रखिए ध्यान

आज से नवरात्रि की शुरूआत हो चुकी है. हर जगह मां दुर्गा की पूजा-अराधना हो रही है. माता के जयकारे सभी मंदिरों और घरों में गूंज रहे हैं. नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है.

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माता कूष्मांडा ने की थी सृष्टि की रचना, चौथे नवरात्र को ऐसे करिए पूजा

ब्रह्मांड की रचना की देवीपौराणिक मान्यता के मुताबिक, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब माता कूष्मांडा ने ही ब्रह्मांड की रचना की थी. मां कूष्मांडा को ही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं. इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है.

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