महानवमी के दिन करें सिद्धिदात्री की पूजा, इस विधि से करें कन्या पूजन

मां सिद्धिदात्री की पूजा में कई प्रकार के सुगंधित फूल अर्पित करने चाहिए. इसेक अलावा नवमी के दिन मां को शहद भी अर्पित करना चाहिए. साथ ही “ॐ सिद्धिदात्री देव्यै नमः” इस मंत्र का उच्चारण भी करना चाहिए. आज नवमी के हर घर और मंदिर में सिद्धिदात्री की पूजा होती है.

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आज 3 राशि के जातकों पर बरसेगी मां काली की कृपा, बरसेगा धन

जैसा कि हम सभी जानते हैं ग्रहों का प्रभाव हमारे जीवन में पड़ता है, जिसके चलते हमें कभी अच्छे तो कभी बुरे दिनों का सामना करना पड़ता है. वहीं आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आज का राशिफल आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन लेकर आ सकता है. तो आइए आपको बताते हैं आज के दिन के बारे में आपके सितारे क्या कहते हैं और 05 अक्टूबर का दिन आपके लिए कैसा रहेगा…

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नवरात्र के 7वें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, जीवन की परेशानियों से मिलेगा छुटकारा

मां कालरात्र‍ि की पूजा में सबसे पहले धूप और दीपक जलाएं. जिसके बाद मां को लाल फूल चढ़ाएं. मां को लाल चुनरी जरूर चढ़ाए. मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां भगवती को केले और बेसन के लड्डू का भोग लगाएं.

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संतान सुख के लिए इस विधि से करें मां स्कंदमाता (Skandmata) की पूजा (Puja)

मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप स्कन्दमाता की पूजा में लाल फूल, कुमकुम, चावल, फल और फूल आदि सामग्री को अर्पित करना चाहिए. मां के इस स्वरूप की पूजा भी देवी के अन्य स्वरूपों की तरह ही होती है. स्कन्दमाता की पूजा के वक्त इस मंत्र का ध्यान से उच्चारण करें. मंत्र- नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्। समग्रतत्वसागररमपारपार गहराम्॥

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नवरात्रि के तीसरे दिन इस विधि-विधान से करें मां चंद्रघंटा की पूजा, ये मंत्र बोलने से मिलेगा लाभ

मां चंद्रघंटा के पूजा में सबसे पहले कलश और नवग्रहों की पूजा करें. इसके बाद में देवी चंदघंटा की पूजा करें. मां चंद्रघंटा की पूजा में इस मंत्र का उच्चारण करें. मंत्र या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। इसके अलावा मां की उपासना करते समय इस मंत्र का उच्चारण करें- पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता, प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।

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आज है नवरात्र का दूसरा दिन, ऐसे करिए मां ब्रह्मचारिणी का प्रसन्न

मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या और उनके त्याग की देवी माना जाता है. मां ब्रह्मचारिणी श्वेत रंग के कपड़े पहनती हैं. वो अपने दांय हाथ में अष्टदल की माला और बांय हाथ में कमंडल लिए हुए हैं. शास्त्रों के अनुसार मां भगवती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजार वर्षों तक केवल फलों का और तीन हजार वर्षों तक केवल पेड़ों की पत्तियों का सेवन कर कठोर तपस्या की थी. माता की कठोर तपस्या के बाद उन्हें ब्रह्मचारिणी रूप की प्राप्ती हुई थी.

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नवरात्रि 2019: पहले दिन इसी विधि विधान से करें मां शैलपुत्री की पूजा, पूर्ण होगी सभी मनोकामनाएं

नवरात्र में नौ में दिन मां के एक-एक रूप की पूजा की जाती है. मां के नौ रूपों के नाम- मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चन्द्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धदात्री. इन नौ रूपों की पूजा नवरात्र के नौ दिनों में की जाती है.

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