BA, BBA, MA, B.ed  जैसी डिग्री होल्डर मनरेगा में कर रहे मजदूरी

बुलंदशहर : कोरोना काल में हुए लॉकडाउन के चलते बड़े शहरों से पलायन करके अपने पैतृक गांव पहुंचने वाले श्रमिकों के लिए फिलहाल सरकार की मनरेगा योजना ही महज एक सहारा बनी हुई है. शहरों से बेरोजगार हुए श्रमिक गांवो में जाकर मनरेगा के तहत काम करके अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं. […]

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यूपी में 3 साल के लिए श्रम कानून समाप्त, मजदूर संगठन बोले अब मनमानी करेंगे ‘मालिक’

लखनऊ: कोरोना काल में पहले नौकरियों पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं कहा जा रहा है कि, इस लॉकडाउन के चलते लाखों नौकरीपेशा लोग प्रभावित हो सकते हैं इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने यूपी में  श्रम अधिनियमों में बदलाव करते हुए लेबर लॉ यानि श्रम कानूनों को निलंबित करने का फैसला लिया है. […]

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847 मजदूरों को लेकर नासिक से लखनऊ पहुंची ट्रेन

लखनऊ:  लॉक डाउन के बीच दूसरे राज्यों में फंसे यूपी के प्रवासी मजदूरों के लिए राहत की खबर है. रविवार को नासिक से ऐसे मजदूरों को लेकर एक स्पेशल ट्रेन लखनऊ पहुंची. इस ट्रेन में तकरीबन 847 यात्री सवार थे. उत्तर प्रदेश पहुंच कर ये यात्री काफी खुश नजर आए. लखनऊ से इन्हें इनके जिलों […]

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साइकिल से बिहार जा रहा था मजदूर, बीच रास्ते में तोड़ा दम

लखनऊ: कोरोनावायरस के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के तीसरा चरण की घोषणा हो चुकी है. इस बीच एक बेहद ही दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां दिल्ली में फंसा एक 28 साल का मजदूर साइकिल से ही बिहार के खगड़िया जिले के लिए निकल गया, लेकिन उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में उसने दम […]

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लॉकडाउन में मजदूरों को मिलने लगा काम, लखीमपुर से हुई शुरुआत

लखीमपुर खीरी : लॉक डॉउन के दौरान बाहर से आये कामगारों के लिए सबसे बड़ी समस्या रोजी रोटी का जुगाड़ और इस समस्या के निदान के लिये सीडीओ अरविंद सिंह ने जनपद में श्रम स्वाभिमान की शुरुआत की है. बाहर से आये लोगो में उनकी काबलियत के अनुसार चिह्नित करने और सूचीबद्ध करने की कवायद […]

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अभी-अभी लॉकडाउन पर मोदी सरकार का बड़ा ऐलान

दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के अलग-अलग जगहों पर फंसे प्रवासी मजदूरों, पर्यटकों, विद्यार्थियों आदि की आवाजाही की अनुमति दे दी है, गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अपने यहां फंसे लोगों को उनके गृह राज्यों में भेजने और दूसरी जगहों से […]

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हालातों के आगे मजबूर है साहब, इसलिए वो मजदूर है…

इन हालात में हर साल हर मजदूर दिवस पर बड़ी-बड़ी सभाएं होती हैं, बड़े-बड़े सेमीनार होते हैं. उन शामियानों में मजदूरों के हक की बातें सुनकर ऐसा लगता है कि मजदूरों कोई समस्या बचेगी ही नहीं, लेकिन ना जाने कितने मई दिवस आकर चले गए. मजदूर की जिंदगी में आज भी अंधेरा है. न्यूनतम मजदूरी के लिए मजबूर है मजदूर.

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