नई दिल्लीः सावन के तीसरे सोमवार यानि की आज नाद पंचमी का शुभ मुहूर्त है. वैसे तो सावन के महीने का हर दिन ही शुभ होता है, लेकिन शुक्ल पक्ष को मनाई जाना वाली पंचमी बेहद खास मानी जाती है. पौराणिक मान्यता है कि इस दिन जो भी भक्त नाग देवता को जल और दूध अर्पित करता है, इसे कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है.
इस बार सोमवार के दिन नाग पंचमी होने से इसका महत्व 10 गुणा बढ़ गया है. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, कई सदियों के बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब नागपंचमी और सोमवार एक ही दिन है. नाग पंचमी के दिन देशभर के मंदिरों में विधिवत नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है. लेकिन उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर की बात अलग है.
यह मंदिर साल में एक बार सिर्फ नाग पंचमी के दिन ही खुलता है. साल में एक बार कपाट खुलने के कारण मंदिर की प्रसिद्धित काफी बढ़ गई है. हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं.
क्या है मंदिर का पौराणिक इतिहास
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रत्येक वर्ष जब नाग पंचमी के दिन मंदिर के कपाट खोले जाते हैं और विधिवत नाग देवता की पूजा होती है, उस वक्त स्वयं नागराज तक्षक मंदिर में उपस्थित रहते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं.
