लखनऊ: मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी हुई एक रिपोर्ट ने प्रदेश की परिधी में हलचल मचा दी है. दरअसल, इस रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने प्रदेश में केवल 3 शिक्षकों की मौत की बात चुनावी ड्यूटी में मानी है. बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी हुए एक पत्र में लिखा है कि, ‘राज्य निर्वाचन आयोग की उपरोक्त गाइडलाइन के अनुसार जिलाधिकारियों द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग को अभी तक 03 शिक्षकों के मृत्यु की प्रमाणित सूचना प्रेषित की गई है. मृतकों के परिवारजनों के प्रति गहरी संवेदना है तथा मृतकों को अनुमन्य अनुग्रह राशि का भुगतान उनके परिजनों के शीघ्र कराया जायेगा’ ।
भ्रमित ना हों: सरकार
इस पत्र में सरकार की ओऱ से कहा गया है कि, राज्य सरकार द्वारा कोविड महामारी की रोकथाम हेतु युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है. अत: सभी से अपील है कि, किसी भी भ्रामक एवं तथयों के विपरित प्रकाशित खबरों से भ्रमित न हों तथा कोविड के रोकथाम हेतु राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास में सहयोग प्रदान करें ।
शिक्षक संगठनों का दावा, 1621 मौत
उत्तर प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने राज्य में हाल में हुए पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले 1,621 शिक्षकों, शिक्षामित्रों तथा अन्य विभागीय कर्मियों की मृत्यु का दावा करते हुए सभी के परिजन को एक-एक करोड़ रुपए मुआवजा राशि और आश्रितों को सरकारी नौकरी की मांग की है, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने 16 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में पंचायत चुनाव ड्यूटी करने वाले 1621 शिक्षकों, अनुदेशकों, शिक्षा मित्रों और कर्मचारियों की कोरोना वायरस संक्रमण से मौत हुई है।
संगठन ने कहां कितनी मौत बताईं
आजमगढ़ जिले में 68, गोरखपुर में 50, लखीमपुर में 47, रायबरेली में 53, जौनपुर में 43, इलाहाबाद में 46, लखनऊ में 35, सीतापुर में 39, उन्नाव में 34, गाजीपुर में 36, बाराबंकी में 34 शिक्षकों-कर्मचारियों की मौत की बात कही है।
