अगर मोदी सरकार ने बनाई JPC तो नहीं बनेगी 2019 में सरकार! ये है वजह

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नई दिल्ली: राफेल विवाद में जेपीसी (ज्वाइंट पार्लियामेंट कमेटी) की एंट्री के बाद मामला और गभीर होता जा रहा है. दरअसल, सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में बताया गया कि, राफेल सौदे में सीएजी(कैग) की रिोपर्ट जेपीसी को भी दी गई है. जिस पर फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विवाद की सारी याचिकाएं खारिज करते हुए सरकार को बड़ी राहत दी. लेकिन मामला तब औऱ गंभीर हो गया जब राहुल गांधी ने जेपीसी चेयरमैन मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए ये आरोप लगा दिया कि, जेपीसी को राफेल सौदे की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है, राहुल गांधी ने कहा कि, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोला है. वहीं विपक्ष अब जेपीसी के गठन की मांग कर रहा है. और इस मुद्दे पर संसद के शीतकालीन सत्र में 4 दिन से संद भी नहीं चल पाई है.

क्या होती है जेपीसी?
JPC यानि ज्वाइंट पार्लियामेंट कमेटी इस कमेी में दोनों सदनों के सदस्य शामिल होते हैं. इसका गठन बेहद गंभीर मसलों पर होता है. ये समिति उस व्यक्ति, संस्था से पूछताछ कर सकती है जिसको लेकर ये समिति बनी हो औऱ अगर वो व्यक्ति उसके सामने पेश नहीं होता है तो ये संसद की अवमानना माना जाता है.. इस समिति में 30-31 सदस्य होते हैं. समिति का चेयरमैन बहुमत वली पार्टी के सदस्य को बनाया जाता है. ये समिति अधिकतम 3 महीने में अपनी जांच पूरी कर सकती है. जांच रिपोर्ट को संसद में पेश करना होता है.

बीजेपी जेपीसी का विरोध क्यों कर रही है
दरअसल राफेल सौदा पीएम मोदी स जुड़ा हुआ है. ऐसे में अगर जेपीसी बनी तो जेपीसी पीएम को पूछताछ के लिए तलब कर सकती है ऐसे में पीएम मोदी से सवाल भी हो सकते हैं. शायद यही वजह है कि, बीजेपी जेपीसी का विरोध कर रही है.

अगली बार नहीं बनी सरकार!
करीब 70 साल के संसदीय इतिहास में 8 बार जेपीसी का गठन हुआ है. इसमें 5 बार ऐसा हुआ है कि, जेपीसी बनाने के बाद सत्ताधारी पार्टी अगला आम चुनाव हारी है. साल 1987 में सबसे पहले राजीव गांधी सरकार ने बोफोर्स मामले में जेपीसी बनाई थी. इसके बाद 1989 में कांग्रेस चुनाव हार गई थी. 1992 में नरसिंहराव सरकार ने बैंकिग लेन-देन और सुरक्षा में धांधली को लेकर जेपीसी बनाई थी. उसके बाद 19996 में हुए चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा. किसी सरकार के कार्यकाल में सबसे ज्यादा दो बार मनमोहन सिंह ने जेपीसी का गठन किया था. उसके बाद कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था. 2003 में वाजपेयी सरकार में भी जेपीसी बनी थी.

जेपीसी बनने पर क्या फैसले हुए
दरअसल, जेपीस की रिपोर्ट पर बहुमत से फैसला होता है. इस समिति में सबसे ज्यादा सदस्य सरकार की ओर से ही होते हैं तो ज्यादातर फैसले सरकार के पक्ष में ही आते हैं. 2जी मामले में भी ऐसा हुआ था. इस समिति में 30 सदस्य थे जिसमें से 15 सदस्यों ने तो समिति के अध्यक्ष को ही हटाने की मांगकी थी. तब रिपोर्ट में कुछ नहीं था लेकिन कोर्ट में टैक्स चोरी और बड़े लेन-देन का मामला आया था.

 

 

जेपीसी ने किन-किन मामलों की जांच की है-

जेपीसी गठन               मामला                                 परिणाम

1987                           बोफोर्स तोप मामला                  1989 में कांग्रेस चुनाव हारी

1992                           सुरक्षा और बैंकिंग लेन-देन       1996 में कांग्रेस हारी

2001                           स्टॉक मार्केट घोटाला कोई       असर नहीं हुआ

2003                          सॉफ्ट ड्रिंक्स, जूस पेस्टीसाइड   बीजेपी हारी

2011                            2जी स्पेक्ट्रम                             2014 में कांग्रेस हारी

2013                           VVIP चॉपर घोटला                  कांग्रेस चुनाव हारी

2015                          भूमि अधिग्रण, पुनर्वास बिल        नतीजा निकला

2015                           NRC                                        नतीजा नहीं निकला

 

 

 

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