बांदा/लखनऊ: अभी तक आपने बेलन से रोटी बनते गेखी होगी. टेढ़े-मेढ़े आटे के पेढे को गोल होते देखा होगा. या कहावत में बेलन से पिटाई की बात सुनी होगी. लेकिन यही बेलन अब टेढ़े मेंढ़े सिस्टम को सीधा करने के लिए थामा जा रहा है. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में महिलाओं की टोली ने टेड़े-मेढ़े सिस्टम को सीधा करने का बीड़ा उठाया है. अत्याचार और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए बेलन फौज बनाई गई है.
‘बेलन वाली फौज’

बुंदेलखंड में वैसे तो वीरता की तमाम कहानियां गढ़ी हुई हैं. यहां की महिलाओं का किरदार भी खूब क्रांतिकारी रहा है. गुलाबी गैंग के बाद अब बेलन वाली फौज ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने का ऐलान किया है. इस फौज की महिला सदस्यों का हथियार होगा बेलन जिसके जरिए वो अपने और समाज के वंचित लोगों के हक को दिलाने का काम करेंगी. इस ‘फौज’ की कमांडर पुष्पा गोस्वामी हैं संगठन का मुख्यालय तो बांदा में हैं वहीं महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट जिलोों में भी इसके ऑफिस हैं. इस संगठन में करीब एक हजार सक्रिय महिलाएं हैं इनमें ज्यादातर घरेलू और कामकाजी महिलाएं हैं.
क्या है ‘बेलन फौज’ का फोकस
इस बेलन फौज की कमांडर पुष्पा गोस्वामी वैसे तो उग्र आंदोलन को कतई गलत नहीं मानती है. उनके मुताबिक हम हिंसा का सहारा नहीं लेते. हां अबला का तमगा हटाने के लिए आवाज जरुर उठाते हैं. वहीं इस फौज का फोकस और मकसद पूछे जाने पर वो कहती हैं कि, मुख्य मकसद तो महिलाओं के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाना है. घरेंलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, छेड़छाड़ के खिलाफ ये एक मुहिम है. इस बेलन की मदद से कई महिलाओं की मदद भी कर चुके हैं. महिलाओं में इसका क्रेज बढ़ रहा है. बेलन फौज किसी की मदद करने के बदले कोई पैसा नहीं लेती है. इस फौज की महिलाएं सुबह अपना काम निपटाकर दूसरी महिलाओं को जागरूक करने निकलती हैं.
कैसे आया बेलन फौज बनाने का विचार
दो बार बांदा की पार्षज पुष्पा बताती हैं कि, 2006 में बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर के खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर एक आंदोलन किया था. उस दौरान चीफ इंजीनियर ने उनसे बद्तमीजी कर दी. पुष्पा ने पास की ही समौसे की दुकान से बेलन उठाकर चीफ इंजीनियर को धुन दिया. बस उसके बाद बेलन की ताकत का एहसास हो गया. और अब इस बेलन से भ्रष्टाचार और अत्याचार का सिर फोड़ा जाएगा.
