लखनऊ: कटऑफ को लेकर कलह में फंसी 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में अब नया मोड़ आ गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में राज्य सरकार के उस शासनादेश को निरस्त कर दिया है जिसमें इस भर्ती परीक्षा के क्वालिफाइंग मार्क्स आरक्षित वर्ग के लिए 60 और सामन्य वर्ग के लिए 65 प्रतिशत कटऑफ तय की थी. अब कोर्ट ने परीक्षा नियंत्रक प्राधिकरण की पिछली भर्ती के मुताबिक ही क्वालिफाइंग मार्क्स तय करने का आदेश दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने 3 महीने के अंदर परिणाम घोषित करने के भी आदेश दिए हैं.
क्या है मामला?
दरअसल, 6 जनवरी 2019 को 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा हुई थी. इस परीक्षा में 4 लाख 10 हजार 440 अभ्यर्थी शामिल हुए थे. इसके बाद सरकार ने 7 जनवरी को शासनादेश जारी किया था कि, अभ्यर्थियों की ज्यादा संख्या होने और शिक्षकों की गुणवत्ता की वजह से इस परीक्षा में कटऑफ के अंक 65 और 60 फीसद रहेंगे. यानि आरक्षित वर्ग के लिए 60 और सामन्य वर्ग के लिए 65 प्रतिशत. इस परीक्षा में शिक्षामित्र भी सम्मिलित हुए थे जिन्हें 25 अंको का भारांक मिला था. शिक्षामित्र और कुछ अन्य लोग ज्यादा कटऑफ का विरोध कर रहे थे. क्योंकि, एक दिसंबर और 5 दिसंबर को जारी हुई 2018 की भर्ती में ये कटऑफ 33 और 30 फीसदी थी.इसी को लेकर करीब 99 अभ्यर्थियों ने कोर्ट में याचिका दायर की थी.
अब कटऑफ घटने से होगी ये कलह
कोर्ट के आदेश से कटऑफ घटने से पास होने वाले शिक्षकों की संख्या ज्यादा हो जाएगी. कटऑफ घटने से पास होने वाले शिक्षकों की संख्या करीब दोगुना हो जाएगी. इस शिक्षक भर्ती में 69 हजार पद हैं ऐसे में एक पद के लिए कम से कम 4 दावेदार होंगे. यानि कई अभ्यर्थियों की नौकरी का सपना पास होने के बाद भी अधूरा रह जाएगा.
शिक्षामित्रों में खुशी की लहर
कटऑफ कम रखने के कोर्ट के इस आदेश के बाद सबसे ज्यादा शिक्षामित्रों में खुशी की लहर है. बता दें कि, सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षामित्रों को इस भर्ती में 25 नंबर का भारांक तय किया था. कटऑफ हाई रहने से ज्यादातर शिक्षामित्र शिक्षक बनने की दौड़ से बाहर हो गए थे. लेकिन अब जब कटऑफ कम रहेगी तो शिक्षामित्र फिर से इसमें शामिल हो जाएंगे.
