दिल्ली/लखनऊ: लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी को दोबारा खड़ा करने के लिए प्रियंका गांधी ने यूपी में संगठन की समीक्षा का काम शुरू कर दिया है. लेकिन समीक्षा के दौरान ऐसा भी दौर आया जब प्रियंका गांधी को पता चला कि, पार्टी के कुछ कद्दावर नेताओं ने अपने ड्राइवर और अपने स्कूल के शिक्षकों को ही अपने जिले में कांग्रेस का जिलाध्यक्ष बनवाकर संगठन पर कब्जा किया है और पार्टी को बुरे हाल में लाने का काम किया है.
कैसे खुली पोल
दरअसल, प्रियंका गांधी हार की समीक्षा के साथ-साथ जिलेवार पार्टी की जमीनी हकीकत भी समझ रही है. इसी सिलसिले में वो पूर्वांचल के नेताओं के साथ बैठक कर रही थीं. बैठक में प्रियंका को पता चला कि, कांग्रेस के बड़े नेताओं ने अपने स्तर पर संगठन के लोककल पदों पर कब्जा कर रखा है और जमीनी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर जमकर मनमानी हो रही है. इसी बैठक में वाराणसी के मंडल के एक जिले के पर्यवेक्षक ने प्रियंका गांधी को बताया कि, उस जिले में कांग्रेस का जिलाध्यक्ष वहां के एक बड़े कांग्रेसी नेता का ड्राइवर है. वहीं फैजाबा मंडल के एक जिले के बारे में बात निकलकर आई कि, वहां के एक कद्दावर नेता ने तो अपने स्कूल के मास्टर को ही जिलाध्यक्ष बना रखा है. इसी किस्सागोई में प्रियंका गांधी ने भी गोरखपुर मंडल के एक जिले का किस्सा सुनाया कि, वहां पर भी कुछ ऐसे ही हाल हैं.
अब प्रियंका का है ये प्लान
लोकसभा चुनाव में हार के बाद प्रियंका गांधी की नजर अब 2022 के चुनाव पर लगी है. इसलिए प्रियंका गांधी अब पार्टी में केवल बदलाव के लिए कोई बदलाव नहीं करना चाहतीं बल्कि, संकेत ये है कि, संगठन में भारी बदलाव किया जाएगा. इस बदलाव के लिए प्रियंका ने अपने तीन सचिवों जुबैर खान, बाजीराव खाडे और सचिन नायक को लगाया है जो सभी जिलों का दौरा करके स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से जमीनी हकीकत समझेंगे ऐसे ड्राइवर और मास्टर बने जिलाध्यक्षों की लिस्ट बनाएंगे. उसके जमीन से जुड़े और जनाधार वाले नेताओं को जिम्मेदारी देंगी. इतना ही नहीं देर रात प्रियंका गांधी ने अपने निजी सचिव को भी हटा दिया है. और अब जेएनयू में सीपीआई के नेता रहे संदीप सिंह को सचिव बनाया है.
