जानिए क्यों 15 मार्च को पार्टी का ऐलान कर रहे चंद्रशेखर, क्या है कांशीराम कनेक्शन ?

अपना लखनऊ होमपेज स्लाइडर

लखनऊ : अब तक आंदोलन तक सीमित रहे भीम आर्मी चीफ चन्द्रशेखर आजाद ने सक्रिय राजनीति में उतरने का ऐलान कर दिया है. उनके ऐलान के साथ ही राजनीतिक पार्टियों में नफा-नुकसान को तौला जाने लगा है. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओम प्रकाश राजभर ने तो उनसे आनन फानन में भेंट भी कर ली, लेकिन जानकारों का मानना है कि चन्द्रशेखर की पार्टी के अस्तित्व में आने से सबसे ज्यादा खलबली बहुजन समाज पार्टी में मची होगी. इस खलबली के पीछे एकमात्र कारण है- दलित राजनीति पर बसपा के एकाधिकार के टूटने का खतरा.

15 को है कांशीराम का जन्मदिन

बता दें कि 15 मार्च को दलितों के मसीहा कहे जाने वाले कांशीराम का जन्मदिन है, लिहाजा जन्मदिन के मौके पर दलित समाज को अपने पक्ष में लाने के लिए चंद्रशेखर उनके जन्मदिन पर पार्टी का ऐलान करने जा रहे हैं ताकि पार्टी पहले दिन से ही दलित वोट बैंक पर अपना दावा पेश कर सके. बता दें कि कांशीराम का जन्म 15 मार्च को 1934 को पंजाब में हुआ था.

बसपा के हाथ से छिटक सकता है वोट बैंक

चंद्रशेखर की पार्टी के ऐलान के बाद माना जा रहा है कि सबसे ज्यादा नुकसान जिसको होगा वो है बहुजन समाज पार्टी. सूबे में अभी तक करीब 22 फीसदी दलित वोट मायावती की पार्टी को मिलता रहा है, हर चुनाव में मायावती का पुख्ता वोटर दलित रहा है, लेकिन अगर 2022 के चुनाव में चंद्रशेखर की पार्टी थोड़ा भी संघर्श करती है तो बसपा के हाथ से बड़ा वोट बैंक फिसल सकता है. वैसे भी मायावती पर किताब लिखने वाले अजय बोस बताते हैं कि चन्द्रशेखर का उदय बसपा के लिए बड़ा डेंट हो सकता है.

युवाओं में चन्द्रशेखर को लेकर क्रेज़

चन्द्रशेखर उसी जाटव जाति से आते हैं जिस जाति की मायावती हैं. ऊपर से दलित युवाओं में चन्द्रशेखर को लेकर थोड़ा क्रेज़ बढ़ा है. हालांति अजय बोस ने ये भी बताया कि चन्द्रशेखर बसपा की जगह तो नहीं ले सकते, लेकिन अपनी अलग पार्टी की पहचान से बसपा को नुकसान जरूर पहुंचा सकते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि मौजूदा दौर में मायावती की राजनीतिक साख गिरती जा रही है और दलित पॉलिटिक्स में एक वैक्यूम बन गया है. अब इसे चन्द्रशेखर रावण कितना भर पाते हैं, ये समय बतायेगा.

 

 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *