आज मनाए छोटी दिवाली, जानिए इस दिन क्यों कहते हैं नरक चतुर्दशी

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नई दिल्ली : आज छोटी दिवाली है. इस दिन को रूप चतुर्दशी कहते हैं. रूप चतुर्दशी को रूप चौदस, नरक चौदस और नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है. इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा करने का विधान है. छोटी दिवाली कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाई जाती है. इस साल रूप चतुर्दशी 6 नवम्बर को मनाई जा रही है. रूप चतुर्दशी को हम छोटी दिवाली के रूप में मनाते हैं. छोटी दिवाली पर शाम के बाद दीपक जलाए जाते हैं. हर जगह इस दिन रोशनी होती है.

क्यों की जाती है छोटी दिवाली की पूजा
आपको बता दें कि नरक चतुर्दशी का पूजन स्वास्थ ठीक करने और अकाल मृत्यु से मुक्ति के लिए की जाती है. पौराणिक मान्यता के मुताबिक कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था और देवताओं और ऋषियों को उससे मुक्ति दिलाई थी. नरक चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है. रूप चतुर्दशी के दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा होती है.

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नरक चतुर्दशी की कथा
भगवान कृष्ण की इस दिन पूजा करने से सौंदर्य की प्राप्ति होती है. रूप चतुर्दशी से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी है. कहा जाता है कि प्राचीन काल में एक योगी हिरण्यगर्भ नामक राज्य में रहते थे. एक बार इस योगी ने प्रभु को पाने की इच्छा जताई. इस लिए उसने समाधि धारण कर ली थी. जिस वजह से उन्होंने अनेक कष्टों का सामना करना पड़ा और वो दुखी रहने लगे.

जिसके बाद एक दिन नारद जी उन योगीराज के पास पहुंचे तभी योगीराज ने अपने दुख के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि मुनिवर मैं प्रभु को पाने की इच्छा से इनकी भक्ति में डूबा रहा इस दौरान मैंने कई कष्टों का सामना किया. लेकिन ऐसा क्यों हुआ. तब योगीराज से नारद ने कहा कि तुमने सही रास्ता अपनाया था लेकिन अपने शरीर का पालन नहीं किया.

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जिस वजह से तुम्हारी ऐसी दशा हुई है. जिसके बाद नारद जी ने उन्हें कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा अराधना और व्रत रखने को कहा. क्योंकि इससे योगी का शरीर पहले की तरह रूपवान और स्वस्थ हो जाएगा. योगी राज ने कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा अराधना और व्रत किया जिससे वह पहले की तरह रूपवान और स्वस्थ हो गया. इसीलिए इसे रूप चतुर्दशी के नाम से जानते हैं.

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