ईद-उल-फितर पर बने बेसहारों का सहारा।

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कानपुर:  कोविड 19 कि रोकथाम के लिए जारी लॉकडाउन की वजह से त्यौहारों की रौनक पूरी तरह से उड़ गई है. मुस्लिम समाज में लोगों के चेहरों पर उदासी है. 25 मई को पूरे हिंदुस्तान में ईद का त्योहार मनाया जाएगा लेकिन देश के हालातों को देखा जाए तो लोग इस बार ईद पर गले मिलकर व हाथ मिला कर एक दूसरे को त्यौहार की मुबारकबाद नही दे सकेंगे. ऐसी स्थिति में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भी जरूरी है.

शिया शहर काजी ने की बैठक

ईद-उल-फितर की नमाज के सम्बन्ध में शिया शहर काज़ी मौलाना हामिद हुसैन ज़ैदी ने शहर कि सभी मस्जिदों के ईमाम के साथ एक बैठक की. इस बैठक में यह निर्णय लिया गया की सभी मुसलमान अपने-अपने घरों में रह कर नमाज़ अदा करेंगे. हालांकि अपना उत्तर प्रदेश से खास बातचीत में हामिद ज़ैदी ने कहा कि इस बार ईद की नमाज नहीं हो पाएगी क्योंकि इसे मस्जिद या ईदगाह में करना जरूरी होता है.  साथ ही इसके बाद एक खास तरह का प्रवचन जिसे ख़ुदबा कहते हैं होना जरूरी होता है.

लॉकडाउन का होगा पालन

ईद-उल-फितर की नमाज के संबंध में हामिद ज़ैदी ने शरीअत की रौशनी में बताया कि लॉकडाउन और धारा-144 लागू है ऐसी सूरत में ईद की नमाज मस्जिदों व ईदगाह में नही होगी. ईद की नमाज इस बार घरों में लोगों को ऑनलाइन के माध्यम से फुरदा पड़नी पड़ेगी. साथ ही सरकार के आदेशों का पालन करते हुए घरों में रह कर ही नमाज़ अदा करें और ज़्यादा से ज़्यादा गरीबों व बेसहारों की फितरा निकालते हुए मदद करें. शाशन-प्रशासन के आदेशों का सहयोग करते हुए सोशल डिस्टनसिंग का पालन करें व कॉल/मैसेज से ही ईद की शुभकामनाएं लोगों को दें.

अपना उत्तर प्रदेश के लिए कानपुर से वरिष्ठ संवाददाता फैज़ान हैदर की रिपोर्ट।

 

 

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