नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजनीति में नरेंद्र मोदी के पदार्पण के बाद कांग्रेस भले ही सिमटती जा रही हो लेकिन स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का उससे जुड़े प्रधानमंत्रियों जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी का रिकार्ड अगले कई सालों तक टूटना मुश्किल है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को छठी बार लालकिले के प्राचीर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया. बता दें कि लालकिले पर सबसे अधिक 17 बार झंडा फहराने का रिकार्ड देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के नाम है. उन्होंने पहले स्वतंत्रता दिवस से लेकर 1963 तक लगातार 17 साल लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया. उनके बाद सबसे अधिक 16 बार तिरंगा फहराने का मौका पंडित जवाहर लाल नेहरू की बेटी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को मिला. उन्होंने 1966 से लेकर 1976 तक 11 बार और 1980 से लेकर 1984 तक पांच बार लालकिले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया. जबकि नेहरू-गांधी परिवार के एक अन्य सदस्य राजीव गांधी को पांच बार ये सम्मान मिला.
जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा के बाद सबसे अधिक 10 बार राष्ट्रीय ध्वज फहराने का रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमत्री डॉ मनमोहन सिंह के नाम दर्ज है. उन्होंने 2004 से लेकर 2013 तक लाल किले के प्राचीर पर तिरंगा फहराया.
अगर कांग्रेस की बात की जाये तो उसके प्रधानमंत्रियों ने 70 साल के इतिहास में 55 बार लालकिले पर तिरंगा फहराया और राष्ट्र को संबोधित किया. इसमें से 38 बार ये गौरव नेहरू-गांधी परिवार के सदस्यों को मिला. कांग्रेस नेता पी. वी. नरसिम्हा राव ने पांच बार और पंडित जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद देश की बागडोर संभालने वाले लाल बहादुर शास्त्री ने दो बार लालकिले के प्राचीर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया.
लाल किले के प्राचीर पर तिरंगा फहराने वाले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों में अटल बिहारी वाजपेयी सबसे आगे हैं. उन्होंने छह बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया. इसके बाद नरेंद्र मोदी हैं जो अब तक 4 बार लाल किले पर तिरंगा फहरा चुके हैं. आपातकाल के बाद 1977 में देश में बनी पहली गैर कांग्रेसी सरकार का नेतृत्व करने वाले मोरार जी देसाई को दो बार लालकिले की प्राचीर पर झंडा फहराने का मौका मिला. जबकि चार प्रधानमंत्रियों चौधरी चरण सिंह, विश्वनाथ प्रताप सिंह, एच. डी. देवेगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल को एक-एक बार ये सम्मान मिला.
बता दें कि चंद्रशेखर भारत के एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें लाल किले की प्राचीर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्र को संबोधित करने का अवसर नहीं मिला. इसके अलावा पंडित नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु होने के समय दो बार कुछ-कुछ समय के लिये प्रधानमंत्री का पद संभालने वाले गुलजारी लाल नंदा को भी ये राष्ट्रीय अवसर नहीं मिला.
