नई दिल्ली: त्योहारों का समय है ऐसे में विधि अनुसार सभी त्योहारों मनाया एवं पूजा अर्चना की जाती है. हिंदू धर्म में दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है. हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन उत्सव मनाया जाता है. इस दिन बलि पूजा, अन्नकूट, मार्गपाली आदि उत्सव भी मनाएं जाते हैं. यह दिन उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है. गोवर्धन पूजा में गोधन मतलब गाय की पूजा की जाती है. हिंदू मान्यता के अनुसार गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है. जिस तरह देवी लक्ष्मी सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं, ठीक उसी तरह गौमाता हमें स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं.
गोवर्धन पूजा को मनाने का तरीका
इस दिन लोग अपने घर के आंगन में गाय के गोबर से एक पर्वत बनाकर उसे जल, मौली, रोली, चावल, फूल दही तथा तेल का दीपक जलाकर उसकी पूजा करते हैं. इसके बाद गोबर से बने इस पर्वत की परिक्रम लगाई जाती है और उसके बाद ब्रज के देवता कहे जाने वाले गिरिराज भगवान को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है.
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गोवर्धन पूजा का महत्व और कहानी पूरी कहानी क्या है?
गोवर्धन पूजा का सीधा संबंध भगवान कृष्ण से है. कहा जाता है कि इस त्योहार की शुरुआत द्वापर युग में हुई थी. हिंदू मान्यता के अनुसार गोर्वधन पूजा से पहले ब्रजवासी भगवान इंद्र की पूजा करते थें लेकिन, भगवान कृष्ण के कहने पर एक वर्ष ब्रजवासियों ने गाय की पजूा की और गाय के गोबर का पहाड़ बनाकर उसकी परिक्रमा की. तभी से हर वर्ष ऐसा किया जाने लगा. जब ब्रजवासियों ने भगवान इंद्र की पूजा करनी बंद कर दी तो वो इस बात से नाराज हो गए और उन्होंने ब्रजवासियों का डराने के लिए पूरे ब्रज को बारिश के पानी में जलमग्न कर दिया.
लोगों के प्राण बचाने के लिए भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को बचाने के लिए पूरा गोवर्धन पर्वत अपनी एक उंगली पर उठा लिया. और लगातार 7 दिन तक भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को उसी गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण देकर उनके प्राणों की रक्षा की. भगवान ब्रह्मा ने जब इंद्र को बताया कि भगवान कृष्ण विष्णु का अवतार हैं तो इस बात को जानकर इंद्र बहुत पछताए और उन्होंने भगवान से क्षमा मांगी. इंद्र का क्रोध खत्म होते ही भगवान कृष्ण ने सातवें दिन गोवर्धन पर्वत नीचे रखकर ब्रजवासियो से यह वचन लिया कि अब से प्रतिवर्ष वह इस पर्वत की पूजा करेंगे और अन्नकूट का उन्हें भोग लगाएंगें तब से लेकर आज तक गोवर्धन पूजा और अन्नकूट हर घर में मनाया जाता है.
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