हर साल गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर फहराया जाने वाला राष्ट्रीय ध्वज आम ध्वज नहीं. दरअसल इसे तैयार करने के लिए कई खास नियमों और मानकों से गुजरना पड़ता है. इसे तैयार करने की प्रक्रिया दो महीने पहले से ही शुरू हो जाती है जिसे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के मुताबिक तैयार किया जाता है. भारत सरकार की तरफ से दो महीने पहले इसका ऑर्डर दिया जाता है जिसकी कीमत 6500 रुपए की है.
दरअसल, कर्नाटक के हुबली स्थित कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ यानी केकेजीएसएसएफ देश में ऐसा इकलौता संगठन है, जिसे तिरंगा बनाने के लिए भारत सरकार से लाइसेंस मिला हुआ है. यह तिरंगा यहां ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के मुताबिक तैयार की जाती है. तिरंगे में प्रयोग होने वाला खादी का कपड़ा बालाकोट जिले के एक गांव के मजदूर तैयार करते हैं.

कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ के सचिव एचएन एंटिन ने बताया कि गणतंत्र दिवस के मौके पर लाल किले पर फहराया जाने वाले तिरंगे का ऑर्डर दो महीने हमें मिल जाता है. तिरंगे के लिए प्रयोग खादी के कपड़े बालाकोट के तुलसीगेरी गांव में तैयार की जाती है. इसके बाद हुबली में इसकी सिलाई की जाती है. यहां 126 कर्मचारी हैं जो सालभर तिरंगा बनाने का काम करते हैं. इनमें ज्यातादर महिलाएं काम करती हैं.
एंटिन ने बताया कि तिरंगा तैयार करने के लिए बीआईएस की गाइडलाइन्स का सख्ती से पालन किया जाता है. इसकी रंगाई, आकार यहां तक कि धागे की मात्रा और सूत की मजबूती भी गाइडलाइन के मुताबिक बनाई जाती है. आपको जानकारी होनी चाहिए कि हमारे देश में फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 के तहत तय मानकों का उल्लंघन एक गंभीर अपराध है जिसके तहत सजा भी मिल सकती है.
बता दें कि यह संघ खादी और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने के लिए स्थापित की गई थी. जिसमें 2004 से राष्ट्रध्वज बनाने के लिए एक खास यूनिट बनाया गया. बाद में इसे खादी एंव ग्रामोद्योग कमीशन से लाइसेंस दिया गया और संघ को 2006 में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड सर्टिफिकेट मिला.
कैसे बनता है यह तिरंगा
लाल किले पर फहराया जाने वाले तिरंगे का आकार 12×8 फीट है. दरअसल तिरंगा बनाने के लिए छह स्टेज से गुजरना पड़ता है. सबसे पहले खादी की हाथ से कताई होती है. इसके बाद बुनाई, रंगाई और चक्र की छपाई होती है. इसके बाद सिलाई और बंधाई की जाती है. एंटिन ने बताया कि हाई मास्ट पर प्रयोग होने वाले तिरंगे का आकार 21×14 फीट होता है. जिसकी कीमत करीब 18000 रुपए होती है. फ्लैग कोड के अनुसार जो राष्ट्रध्वज बनते हैं उनका आकार 3:2 होता है. जबकि इसके अलावा 11 अलग-अलग आकार में भी तिरंगे बनाए जाते हैं. उदाहरण के तौर पर, वीवीआईपी फ्लाइट के लिए 450×300मिमी, मंत्रियों की गाड़ियों के लिए 225×150 मिमी और टेबल फ्लैग 150×100 मिमी आकार की होती है.
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