गुजरात-झारखण्ड के बाद यूपी ने गरीबों को 10% आरक्षण देने के फैसले पर लगाई मुहर

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लखनऊ : यूपी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए गरीबों को 10% आरक्षण दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. योगी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को 10% आरक्षण के लिए अध्यादेश से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसी के साथ यह आरक्षण व्यवस्था 14 जनवरी से लागू हो गई है. उत्तर प्रदेश ऐसा तीसरा राज्य है जिसने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने वाले व्यवस्था को लागू किया है. इससे पहले योगी सरकार गुजरात और झारखंड सरकार आरक्षण कानून को मंजूरी दे चुकी हैं.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बीते शनिवार को सामान्य वर्ग के गरीबों को नौकरियों और शिक्षा में 10% आरक्षण से संबंधित संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम 2019 को मंजूरी दे दी थी. अब देश में सरकारी नौकरी और शैक्षणिक संस्थानों में 10% आरक्षण का रास्ता साफ हो गया था. आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को नौकरी और शिक्षा में 10% आरक्षण देने वाला यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन कर सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का प्रावधान करता है.

आपको बता दें कि इससे 8 लाख रुपये तक की वार्षिक आमदनी वालों को लाभ मिलेगा. आरक्षण को प्रदेश में लागू करने को लेकर कई विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं. वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस व्यवस्था को लागू करने से इनकार कर दिया है. ममता के अलावा डीएमके प्रमुख ने एमके स्टालिन ने भी गरीबी आधारित आरक्षण का पूरजोर विरोध किया है. इतना ही नहीं डीएमके ने इसके खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है. इस याचिका में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों के लिए केंद्र द्वारा लागू किए गए आरक्षण व्यवस्था को संविधान के खिलाफ और एससी-एसटी के खिलाफ बताया है.

डीएमके ने इंदिरा साहनी केस का हवाला देते हुए कहा है कि उस वक्त सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा था कि आर्थिक मानदंड संविधान के तहत आरक्षण का एकमात्र आधार नहीं हो सकता. बता दें कि इंदिरा साहनी मामले में 9 जजों द्वारा कहा गया था कि आर्थिक मानदंड आरक्षण का एकमात्र आधार नहीं हो सकता है. इसे अवैध ठहराया जाना चाहिए क्योंकि इसमें फैसले का खंडन किया गया है.

इस मामले में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि सामान्य वर्ग में आने वाले लोगों को आर्थिक आधार पर नौकरियों और शिक्षा में 10% आरक्षण की संवैधानिक वैधता वाली इस व्यवस्था से सामान्य वर्ग के पिछड़े लोगों को मदद मिलेगी. साथ ही उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा. उन्होंने इस व्यवस्था का विरोध कर रहीं पार्टियों और नेताओं पर भी हमला किया और कहा कि कांग्रेस ने ऊंची जातियों के गरीबों के लिए 10% आरक्षण से संबंधित विधेयक का समर्थन मन से नहीं कर रही है.

अरुण जेटली ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि ‘गरीबी आधारित आरक्षण के एजेंडा को मजबूत करने का प्रधानमंत्री का फैसला सामान्य श्रेणी के गरीबों के लिए अबतक का सबसे बड़ा कदम है. इस देश से गरीबी को हटाने की जरूरत है. प्रमुख विपक्षी दल खाली मुंह से इसका समर्थन कर रही है, जबकि वास्तव में वह इसमें पेंच पैदा करने की कोशिश कर रही है.

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