लखनऊ: गृहमंत्री राजनाथ सिंह उस वक्त अनुदेशकों के गुस्से का सामना करना पड़ा, जब वो राजधानी लखनऊ में एक कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे. दरअसल, सूबे के हजारों अनुदेशक अपने मानदेय की मांग लेकर राजधानी लखनऊ में इक्ट्ठा हुए थे. अपनी मांगों के लिए अनुदेशकों ने प्रदर्शन किया और सरकार से अपना बढ़ा हुआ मानदेय देने की मांग की. प्रदर्शन के दैरान अनुदेशकों का पता चला कि, गृहमंत्री राजनाथ सिंह भारतीय लोधी महासभा के एक कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं. तब अनुदेशकों ने गृहमंत्री से गुहार लगानी चाही. लेकिन मिलने से रोकने पर मामला बढ़ा और अनुदेशकों ने अपनी मांगो को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी.
अनुदेशकों का आरोप धमकी दी गई!
अनुदेशकों ने प्रदेश सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया तो गृमंत्री को भाषण बीच में रोककर शांति बनाए रखने की अपील करनी पड़ी. बाद में राजनाथ सिंह ने अनुदेशकों को मिलने के लिए बुलाया और उनकी बात सुनी, लेकिन इस मुलाकात के बाद भी अनुदेशकों का आरोप है कि, उनकी बात सुनने के बजाए उन्हें धमकाया गया है.
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अनुदेशकों की मांग क्या है
दरअसल, अनुदेशकों का कहना है कि, मार्च 2017 में खुद मुख्यमंत्री योगी आधत्यनाथ ने उनका मानदेय 17 हजार रुपये करने का ऐलान किया था. लेकिन आजतक उनको बढ़ा हुआ मानदेय नहीं मिला है. अनुदेशकों ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि, पहले तो बढ़ा हुआ मानदेय दिया जाए. उन सभी को नियमित किया जाए. अनुदेशक की मौते के बाद परिवार को 10 लाख की आर्थिक मदद दी जाए.
सीएम से भी लगा चुके हैं गुहार

प्रदेश के इन अनुदेशको की पीड़ा पुरानी है. हर मंच, हर राजनेता से अपनी बात कह-कह कर थक गए लेकिन कोई कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई. इतना ही नहीं बिजनौर में खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने भी इन्होंने अपनी मांग रखी थी.
कौन हैं अनुदेशक
दरअसल, अनुदेशकों का अहम कार्य शारिरिक प्रशिक्षण, फल संरक्षण, कला, कृषि और कंप्यूटर की शिक्षा देना है. मौजूदा समय में इनको 8,470 रूपये का मानदेय मिलता है. फिलहाल ये 17 हजार रूपये महीने के मानदेय की मांग कर रहे हैं जिसे केंद्र सरकार मंजूरी भी मिल चुकी है.लेकिन इन लोगों को तमाम आश्वासन के बाद भी बढ़ा हुआ मानदेय नहीं मिल रहा है. जबकि, 31 हजार से ज्यादा अनुदेशकों को राज्य सरकार और केंद्र सरकार की सहमति से पैब की मीटिंग में 17000 मानदेय तय हुआ लेकिन मिल रहे है 8470 रुपये.
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